‘ये बच्चे हैं… छोड़ दो!’—भाजपा नेता हत्याकांड में नया बवाल, कोतवाल पर समझौते का दबाव बनाने का आरोप

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देहरादून। भाजपा नेता विनोद कश्यप हत्याकांड में अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। हत्या के बाद जहां पुलिस आरोपितों की गिरफ्तारी और जांच का दावा कर रही है, वहीं पीड़ित परिवार ने सहसपुर कोतवाल की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। परिवार का आरोप है कि पुलिस ने मुख्य आरोपितों को उनके सामने बैठाकर समझौते का दबाव बनाया और कार्रवाई के बजाय आरोपितों के प्रति नरमी दिखाई।

मृतक के भाई अशोक कुमार का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में उन्होंने आरोप लगाया कि घटना से जुड़े कुछ वीडियो की पहचान कराने के बहाने उनके छोटे भाई को सहसपुर कोतवाली बुलाया गया था। जब वह अपने परिजनों के साथ वहां पहुंचे तो देखा कि हत्या के मुख्य आरोपित अमन, सावेज और आजम पुलिसकर्मियों के साथ कोतवाल के कमरे में बैठे हुए थे।

परिवार का कहना है कि इसी दौरान एक आरोपी ने हाथ जोड़कर माफी मांगनी शुरू कर दी। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो पुलिस ने बीच-बचाव किया। अशोक कुमार का आरोप है कि सहसपुर कोतवाल ने उनसे कहा, “ये बच्चे हैं, इनकी जिंदगी खराब हो जाएगी, इन्हें छोड़ दो। अब इसमें कुछ नहीं हो सकता।” इसके बाद भी लगातार समझौता करने का दबाव बनाया गया।

पीड़ित परिवार ने सवाल उठाया कि हत्या जैसे गंभीर मामले में आरोपितों और पीड़ित पक्ष को आमने-सामने बैठाने की क्या जरूरत थी। उनका कहना है कि पुलिस का काम निष्पक्ष जांच करना है, न कि दोनों पक्षों के बीच समझौता कराना। परिवार का आरोप है कि इस पूरे घटनाक्रम से उन्हें निष्पक्ष जांच पर भरोसा नहीं रह गया है।

परिवार ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और पुलिस मुख्यालय से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, सहसपुर कोतवाल को तत्काल हटाने तथा पूरे प्रकरण की विवेचना किसी अन्य अधिकारी से कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक मौजूदा पुलिस टीम जांच करेगी, उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

देहरादून के सेलाकुई क्षेत्र में भाजपा नेता विनोद कश्यप की कुछ दिन पहले दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी। शुरुआती तौर पर मामला पानी के विवाद से जुड़ा बताया गया, लेकिन पुलिस जांच में सामने आया कि दोनों पक्षों के बीच पुरानी रंजिश थी और आरटीआई से जुड़े विवाद ने तनाव को और बढ़ा दिया था। घटना के बाद क्षेत्र में भारी तनाव फैल गया था। पुलिस अब तक कई आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि अन्य फरार आरोपितों की तलाश जारी है। प्रशासन ने मुख्य आरोपितों के अवैध निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई भी की थी।

अब पीड़ित परिवार द्वारा पुलिस की भूमिका पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद यह मामला नए मोड़ पर पहुंच गया है। यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो जांच प्रक्रिया पर भी बड़े सवाल खड़े हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।