पिथौरागढ़। विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी कांग्रेस के लिए पिथौरागढ़ की परिवर्तन संकल्प रैली उस समय असहज स्थिति में बदल गई, जब पार्टी के भीतर की गुटबाजी सार्वजनिक रूप से सामने आ गई। प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की मौजूदगी में मंच से ही नेताओं के बीच मतभेद खुलकर सामने आए और कार्यकर्ताओं ने विधायक के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।
जिला पंचायत सभागार में आयोजित रैली में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, पिथौरागढ़ विधायक मयूख महर, धारचूला विधायक हरीश धामी, पूर्व विधायक हेमेश खर्कवाल सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। कार्यक्रम का उद्देश्य संगठन को मजबूत करने और आगामी चुनावों के लिए कार्यकर्ताओं में उत्साह भरना था, लेकिन मंच पर हुए घटनाक्रम ने पूरे आयोजन का केंद्र बदल दिया।
महिला जिलाध्यक्ष के बयान से बढ़ा विवाद
कार्यक्रम के दौरान महिला जिलाध्यक्ष भावना नगरकोटी ने निकाय चुनाव के समय पार्टी के भीतर हुए घटनाक्रम का जिक्र करना शुरू किया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में कांग्रेस के अधिकृत कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की गई और उन्हें व्यक्तिगत स्तर पर भी अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा।
बताया जाता है कि जब उन्हें आगे बोलने से रोका गया तो उनके समर्थक नाराज हो गए। कुछ कार्यकर्ता मंच तक पहुंच गए और विधायक मयूख महर के खिलाफ नारे लगाने लगे। इससे कार्यक्रम में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
नारेबाजी और हंगामे के बीच विधायक मयूख महर ने नाराजगी जताई और कार्यक्रम छोड़कर चले गए। घटना के बाद कांग्रेस नेताओं के बीच असहज माहौल बन गया और संगठनात्मक अनुशासन पर भी सवाल उठने लगे।
गोदियाल ने दिया एकजुटता का संदेश
स्थिति को संभालते हुए प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कार्यकर्ताओं और नेताओं से आपसी मतभेद भुलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की असली ताकत उसके कार्यकर्ता हैं और यदि संगठन के लोग ही एक-दूसरे से टकराएंगे तो पार्टी कमजोर होगी।
उन्होंने कहा कि “बीज बचेंगे तभी फसल लहलहाएगी। आपस में टकराने के बजाय संगठन को मजबूत करने पर ध्यान देना होगा।” साथ ही उन्होंने नेताओं को अनुशासन बनाए रखने और व्यक्तिगत मतभेदों को सार्वजनिक मंच पर न लाने की नसीहत भी दी।
विधायक ने लगाया साजिश का आरोप
घटना के बाद विधायक मयूख महर ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष के दौरे को लेकर कार्यकर्ताओं में उत्साह था, लेकिन कुछ लोगों ने राजनीतिक कारणों से कार्यक्रम का माहौल खराब करने की कोशिश की। उनके अनुसार मंच से व्यक्तिगत आरोप लगाकर पूरे आयोजन को विवादित बनाया गया।
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस लगातार संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। ऐसे समय में सार्वजनिक मंच पर सामने आई गुटबाजी पार्टी के लिए चुनौती मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि आंतरिक मतभेद समय रहते नहीं सुलझे, तो चुनावी रणनीति पर इसका असर पड़ सकता है।


