हल्द्वानी/नैनीताल। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ कुमाऊं का सियासी तापमान बढ़ने लगा है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के हल्द्वानी दौरे में पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश के बाद अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का नैनीताल दौरा राजनीतिक तौर पर खासा अहम माना जा रहा है। धामी रविवार को गोलापार स्थित नंधौरगढ़ पैलेस में कुमाऊं संभाग के भाजपा जिलाध्यक्षों और मंडल अध्यक्षों के साथ बैठक करेंगे। इसके बाद अल्मोड़ा और नैनीताल लोकसभा क्षेत्र के सांसदों और विधायकों के साथ भी अलग-अलग मंथन होगा।
खड़गे के हल्द्वानी दौरे को कांग्रेस ने जहां आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सियासी शंखनाद के तौर पर पेश किया, वहीं अब भाजपा की ओर से कुमाऊं में संगठन और जनप्रतिनिधियों को एक साथ बैठाकर चुनावी तैयारियों की समीक्षा को जवाबी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री की बैठक में केवल संगठन की स्थिति या सरकारी योजनाओं की समीक्षा ही नहीं, बल्कि विधानसभा सीटवार राजनीतिक समीकरण, संगठन की सक्रियता, कार्यकर्ताओं की भूमिका और आगामी चुनाव में पार्टी की रणनीति जैसे मुद्दे भी अहम रहने की संभावना है। सांसदों और विधायकों के साथ होने वाला मंथन इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि चुनावी मैदान में उतरने से पहले भाजपा सरकार और संगठन के बीच तालमेल को और मजबूत करना चाहती है।
कुमाऊं की राजनीति में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही अपनी जमीन मजबूत करने में जुटी हैं। ऐसे में एक तरफ खड़गे का हल्द्वानी से कांग्रेस कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारी का संदेश और दूसरी तरफ मुख्यमंत्री धामी का नैनीताल में भाजपा संगठन व जनप्रतिनिधियों के साथ मंथन—दोनों घटनाक्रमों ने आगामी विधानसभा चुनाव की तस्वीर को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।
अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कौन पार्टी कितनी सीटें जीतती है, बल्कि कुमाऊं में किसका संगठन ज्यादा मजबूत है, कौन जनता के मुद्दों को चुनावी मुद्दा बना पाता है और कौन बूथ स्तर तक अपनी पकड़ मजबूत कर पाता है, आने वाले महीनों में सियासत का असली मुकाबला इसी मोर्चे पर दिखाई देगा।



