राजनीति में विरोध और बयानबाजी कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब सियासी हमला नेताओं के परिवार तक पहुंच जाए तो विवाद और बड़ा हो जाता है। तमिलनाडु में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जिसने अब राजनीतिक मर्यादा और नेताओं के निजी जीवन को चुनावी बहस में घसीटने पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय पर निशाना साधते हुए ऐसी टिप्पणी कर दी, जिसके बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। नागेंद्रन ने विजय के विधानसभा में ‘पिता कहां हैं’ वाले सवाल पर तंज कसते हुए कहा कि इसका जवाब विधानसभा में नहीं मिलेगा, इसके लिए घर जाकर अपनी मां से पूछना चाहिए।
यह बयान सामने आते ही तमिलनाडु की राजनीति में हलचल तेज हो गई। खास बात यह है कि बयान पर सिर्फ विपक्ष ने ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि बीजेपी के भीतर से भी इसे लेकर आपत्ति सामने आई।
विजय की पुरानी टिप्पणी का जवाब था हमला
पूरा विवाद मुख्यमंत्री विजय की विधानसभा में की गई एक पुरानी टिप्पणी से जुड़ा है। अप्रैल 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद विजय ने ‘कुट्टी कथई’ यानी छोटी कहानी के अंदाज में डीएमके नेतृत्व पर निशाना साधा था। इस दौरान उदयनिधि स्टालिन के पिता को लेकर की गई टिप्पणी को लेकर भी राजनीतिक विवाद हुआ था।
इसी टिप्पणी का जवाब देते हुए बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष नागेंद्रन ने विजय पर पलटवार किया। लेकिन पलटवार करते हुए उन्होंने जिस तरह मुख्यमंत्री की मां का जिक्र किया, उसी ने बयान को राजनीतिक विवाद में बदल दिया।
अन्नामलाई ने जताई नाराजगी
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने साफ कहा कि सरकार से सवाल करना और राजनीतिक विरोध करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन किसी नेता के परिवार, खासकर उसकी मां को लेकर व्यक्तिगत टिप्पणी करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने ऐसी बयानबाजी को राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताया और कहा कि युवा पीढ़ी के सामने इस तरह की राजनीति को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए।
विवाद बढ़ा तो दी सफाई
बयान पर विवाद बढ़ने के बाद नैनार नागेंद्रन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि ‘Oru Naadu 2.0’ के पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में दिया गया उनका बयान किसी व्यक्ति को निशाना बनाने या गलत मंशा से नहीं दिया गया था। नागेंद्रन ने आरोप लगाया कि उनके बयान को राजनीतिक फायदे के लिए तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। उन्होंने अपनी सफाई में मां, मातृभूमि और मातृभाषा के प्रति सम्मान का भी जिक्र किया।



