रुद्रपुर। प्रतिबंधित नशीले इंजेक्शनों की तस्करी से जुड़े करीब छह वर्ष पुराने मामले में उधम सिंह नगर की विशेष एनडीपीएस अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए शहनाज को दोषी करार दिया है। अदालत ने आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि यदि जुर्माना जमा नहीं किया जाता है तो दोषी को तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
अभियोजन के अनुसार यह मामला फरवरी 2020 का है। उस समय रंपुरा चौकी पुलिस को सूचना मिली थी कि खेड़ा क्षेत्र स्थित चांद मस्जिद के आसपास एक महिला प्रतिबंधित नशीले इंजेक्शनों की अवैध बिक्री कर रही है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने महिला पुलिसकर्मियों सहित एक टीम गठित कर मौके पर घेराबंदी की। पुलिस को देखकर महिला भागने लगी, लेकिन टीम ने उसे तत्काल पकड़ लिया।
नियमों के तहत कराई गई तलाशी में महिला के कब्जे से बड़ी मात्रा में प्रतिबंधित इंजेक्शन और दवाइयां बरामद हुईं। बरामद सामग्री में ब्यूप्रेनॉर्फिन के 108 इंजेक्शन, डायजापाम के 108 इंजेक्शन तथा एविल की 115 शीशियां शामिल थीं। इतनी बड़ी मात्रा में नशीले इंजेक्शनों की बरामदगी के बाद पुलिस ने सभी दवाओं को कब्जे में लेकर आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया।
जांच पूरी होने के बाद विवेचक ने न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने बरामदगी, जांच प्रक्रिया और अन्य तथ्यों से जुड़े गवाहों के बयान तथा दस्तावेजी साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों का परीक्षण करने के बाद माना कि अभियोजन पक्ष आरोप सिद्ध करने में सफल रहा।
विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस) दीपाली शर्मा ने मामले में फैसला सुनाते हुए महिला को दोषी ठहराया और 10 वर्ष के कठोर कारावास के साथ एक लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया। आदेश में यह भी कहा गया कि जुर्माना अदा न करने की स्थिति में दोषी को तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
करीब छह वर्षों तक चली न्यायिक प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले को नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि युवाओं को नशे के जाल से बचाने और मादक पदार्थों की अवैध तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए भविष्य में भी इसी प्रकार की कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।


