गदरपुर। उत्तराखंड की राजनीति में पिछले कई महीनों से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और गदरपुर विधायक तथा पूर्व खेल मंत्री अरविंद पांडे के संबंधों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म था। कभी सरकारी कार्यक्रमों में दूरी, कभी संगठन और सरकार को लेकर पांडे के तीखे तेवर और कभी उनके नाम से वायरल हुए पत्र ने सियासी गलियारों में यह सवाल खड़ा कर दिया था कि क्या भाजपा के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है?
लेकिन शनिवार को गदरपुर में जो तस्वीरें सामने आईं, उन्होंने राजनीतिक समीकरणों को लेकर नए संकेत दे दिए। पहले मुख्यमंत्री धामी और अरविंद पांडे हरीपुरा बौर जलाशय में एक साथ मोटरबोटिंग करते दिखाई दिए। इसके बाद मुख्यमंत्री पांडे के आवास पहुंचे, जहां दोनों नेताओं के बीच करीब 45 मिनट तक बंद कमरे में बातचीत हुई।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह सिर्फ शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की संगठनात्मक एकजुटता का सार्वजनिक प्रदर्शन भी था।
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क्यों चर्चा में रहे अरविंद पांडे…?
पूर्व खेल मंत्री अरविंद पांडे पिछले कुछ समय से अपनी ही सरकार और संगठन को लेकर असहज दिखाई दे रहे थे। प्रधानमंत्री के देहरादून कार्यक्रम में उनका पीछे बैठना, पार्टी बैठकों में अलग रुख और सरकार के कामकाज को लेकर समय-समय पर उठाए गए सवाल चर्चा का विषय बने रहे।
इतना ही नहीं, उनके नाम से प्रधानमंत्री को संबोधित एक कथित पत्र भी वायरल हुआ था, जिसने प्रदेश की राजनीति में हलचल पैदा कर दी थी। हालांकि बाद में पांडे ने इसे फर्जी बताते हुए कांग्रेस पर साजिश का आरोप लगाया था।
पहले बड़े नेता पहुंचे, अब खुद पहुंचे मुख्यमंत्री
अरविंद पांडे को लेकर भाजपा नेतृत्व की चिंता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों सांसद अनिल बलूनी, पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट भी उनसे मिलने गदरपुर पहुंचे थे। अब मुख्यमंत्री धामी का स्वयं उनके घर जाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पार्टी किसी भी तरह की नाराजगी को चुनावी मुद्दा बनने से पहले खत्म करना चाहती है।
खेल से राजनीति तक का संदेश
संयोग नहीं है कि यह मुलाकात उस दिन हुई जब मुख्यमंत्री अंतरराष्ट्रीय क्याकिंग एवं कैनोइंग प्रतियोगिता की तैयारियों का जायजा लेने गदरपुर पहुंचे थे। खेल विभाग संभाल चुके अरविंद पांडे की पहचान खेलों को बढ़ावा देने वाले नेता के रूप में भी रही है। ऐसे में खेल आयोजन के मंच से दोनों नेताओं का साथ दिखना राजनीतिक और प्रतीकात्मक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
2027 चुनाव और भाजपा की रणनीति
उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन भाजपा ने संगठनात्मक स्तर पर तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी अच्छी तरह जानती है कि तराई क्षेत्र की सीटें सत्ता की राह तय करने में अहम भूमिका निभाती हैं। गदरपुर क्षेत्र में अरविंद पांडे का प्रभाव किसी से छिपा नहीं है। ऐसे में भाजपा नेतृत्व किसी भी तरह के असंतोष या गुटबाजी के संदेश को खत्म करना चाहता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2027 की लड़ाई केवल विपक्ष से नहीं, बल्कि संगठन के भीतर समन्वय बनाए रखने की भी होगी।
क्या सचमुच खत्म हुई दूरियां…?
मुलाकात के बाद अरविंद पांडे के बदले हुए तेवर भी चर्चा का विषय बने। उन्होंने मुख्यमंत्री के दौरे को पारिवारिक बताया और कहा कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन सभी कार्यकर्ता भाजपा और संघ परिवार के सिपाही हैं। साथ ही उन्होंने 2027 में भाजपा को फिर से सत्ता में लाने का संकल्प भी दोहराया।
फिलहाल गदरपुर से निकली तस्वीरें यही बता रही हैं कि भाजपा 2027 की लड़ाई में उतरने से पहले अपने हर बड़े चेहरे को एक मंच पर लाने की कवायद में जुट चुकी है। और इस लिहाज से धामी-पांडे की मुलाकात सिर्फ एक मुलाकात नहीं, बल्कि आने वाले चुनावी मौसम का पहला बड़ा राजनीतिक संकेत भी मानी जा रही है।

