सितारगंज (ऊधम सिंह नगर)। सितारगंज तहसील में बुधवार को विजिलेंस की रिश्वत विरोधी कार्रवाई के बाद जमकर हंगामा हुआ। विजिलेंस टीम द्वारा तहसील में तैनात वरिष्ठ सहायक भूपेंद्र सिंह राणा और एक संग्रह अमीन को कथित रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के बाद लेखपाल संघ और संग्रह अमीन संघ के पदाधिकारी व कर्मचारी विरोध में उतर आए। आक्रोशित कर्मचारियों ने तहसील परिसर के मुख्य गेटों पर ताले जड़ दिए, जिससे विजिलेंस टीम करीब छह घंटे तक परिसर के भीतर ही फंसी रही।
विजिलेंस की कार्रवाई की सूचना मिलते ही लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष पिंटू कुमार गौतम और संग्रह अमीन संघ के जिलाध्यक्ष उमाशंकर के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कर्मचारी तहसील परिसर पहुंच गए। कर्मचारियों ने गिरफ्तारी को गलत बताते हुए नारेबाजी की और विजिलेंस की कार्रवाई का विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते तहसील परिसर में तनाव का माहौल बन गया।
विरोध प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने तहसील के मुख्य प्रवेश द्वारों पर ताले लगा दिए। इससे विजिलेंस टीम परिसर से बाहर नहीं निकल सकी। इस दौरान विजिलेंस अधिकारियों और कर्मचारी संगठनों के बीच कई दौर की वार्ता हुई, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। दोनों पक्ष अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे।
संग्रह अमीन संघ के जिलाध्यक्ष उमाशंकर ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार कर्मचारियों के पास से बरामद धनराशि रिश्वत की नहीं, बल्कि बकायेदारों से नियमानुसार की गई राजस्व वसूली की थी। उनका कहना था कि सरकारी राजस्व की रकम को रिश्वत बताकर कर्मचारियों का उत्पीड़न किया जा रहा है। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई।
वहीं, विजिलेंस टीम के प्रभारी प्रभात कुमार ने कहा कि टीम ने शिकायत और साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की है। यदि किसी पक्ष को कार्रवाई पर आपत्ति है तो वह अदालत में अपना पक्ष रख सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले में विधिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
करीब छह घंटे तक चले गतिरोध के दौरान तहसील परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में हालात पर लगातार नजर रखी गई। लंबे गतिरोध और बातचीत के बाद स्थिति सामान्य हुई और विजिलेंस टीम तहसील परिसर से बाहर निकल सकी।
उल्लेखनीय है कि इसी मामले में विजिलेंस ने बुधवार को वरिष्ठ सहायक भूपेंद्र सिंह राणा और एक संग्रह अमीन को कथित रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार कर उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। अब इस पूरे प्रकरण ने प्रशासनिक कार्रवाई और कर्मचारी संगठनों के विरोध के चलते नया विवाद खड़ा कर दिया है।



