उत्तराखंड में राहुल गांधी का बड़ा दांव! क्या मोहम्मद दीपक के बहाने साधेंगे अल्पसंख्यक वोट बैंक?

Spread the love

हल्द्वानी। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव भले अभी दूर हों, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीतियां बनानी शुरू कर दी हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का उत्तराखंड दौरा कई मायनों में खास माना जा रहा है।

अल्मोड़ा में जनसभा, पौड़ी में पूर्व सैनिकों से संवाद और देहरादून में कांग्रेस नेताओं के साथ बैठक के बीच सबसे ज्यादा चर्चा कोटद्वार के जिम संचालक मोहम्मद दीपक को लेकर है। माना जा रहा है कि राहुल गांधी अपने पुराने वादे को निभाते हुए उनके जिम की सदस्यता ले सकते हैं।

दरअसल, जनवरी 2026 में कोटद्वार में एक विवाद के दौरान मोहम्मद दीपक अचानक सुर्खियों में आ गए थे। उस समय उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी पहचान “मोहम्मद दीपक” बताई थी, जिसके बाद उनका मामला राष्ट्रीय स्तर तक चर्चा का विषय बना। राहुल गांधी ने तब उन्हें “मुहब्बत की दुकान” का प्रतीक बताया था और बाद में दिल्ली में उनसे मुलाकात भी की थी।

अब जब राहुल गांधी उत्तराखंड आ रहे हैं, तो उनकी संभावित मुलाकात को सिर्फ एक व्यक्तिगत मुलाकात नहीं बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस इस संदेश को मजबूत करना चाहती है कि वह अल्पसंख्यकों, वंचित वर्गों और सामाजिक सौहार्द के मुद्दों पर खुलकर उनके साथ खड़ी है।

उत्तराखंड में मुस्लिम आबादी भले कुछ क्षेत्रों तक सीमित हो, लेकिन हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर, रुड़की, मंगलौर, लक्सर, काशीपुर, बाजपुर और आसपास की कई सीटों पर अल्पसंख्यक मतदाता चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। ऐसे में कांग्रेस का यह कदम सीधे तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय को राजनीतिक संदेश देने की कोशिश माना जा सकता है।

साथ ही राहुल गांधी लगातार “नफरत के बाजार में मुहब्बत की दुकान” वाले अपने राजनीतिक संदेश को देशभर में आगे बढ़ा रहे हैं। उत्तराखंड में मोहम्मद दीपक से जुड़ा यह प्रतीकात्मक कदम उसी अभियान का हिस्सा भी माना जा रहा है।

दूसरी ओर, कांग्रेस के लिए यह दौरा संगठनात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी राज्य में गुटबाजी को कम करने, कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने और भाजपा के खिलाफ मजबूत माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। राहुल गांधी की मौजूदगी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए भी ऊर्जा का काम कर सकती है।

हालांकि भाजपा इस पूरे घटनाक्रम को “तुष्टिकरण की राजनीति” बताकर कांग्रेस पर निशाना साध सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तराखंड की राजनीति में नई बहस छेड़ सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मोहम्मद दीपक के जिम तक राहुल गांधी का पहुंचना सिर्फ एक वादा पूरा करना होगा, या फिर यह उत्तराखंड में कांग्रेस के मिशन-2027 का पहला बड़ा राजनीतिक संदेश साबित होगा?