“तलवारें, तनाव और गुरुद्वारा: आखिर हेमकुंड यात्रा मार्ग पर ऐसा क्या हुआ कि रातभर डटा रहा प्रशासन?”

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रुद्रप्रयाग। शांत और आध्यात्मिक माहौल के लिए पहचाने जाने वाले हेमकुंड साहिब यात्रा मार्ग पर शुक्रवार शाम अचानक ऐसा घटनाक्रम सामने आया, जिसने स्थानीय लोगों और यात्रियों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। नगरासू स्थित गुरुद्वारा दमदमा साहिब में कुछ निहंगों के विरोध प्रदर्शन के बाद माहौल तनावपूर्ण हो गया और सुरक्षा एजेंसियों को तत्काल हस्तक्षेप करना पड़ा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शाम के समय गुरुद्वारा परिसर में पहुंचे कुछ निहंगों ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते विवाद बढ़ा और परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कुछ लोगों के छत पर चढ़कर हथियार लहराने की खबरों ने आसपास मौजूद लोगों की चिंता और बढ़ा दी।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और आईटीबीपी की टीमें मौके पर पहुंच गईं। पूरे क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई और हालात को नियंत्रित करने के लिए लगातार निगरानी की गई। देर रात तक अधिकारी मौके पर डटे रहे और स्थिति को शांतिपूर्ण बनाए रखने के प्रयास जारी रहे।

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“कर्णप्रयाग से शुरू हुआ विवाद, नगरासू तक पहुंची चिंगारी?

सूत्रों के अनुसार, निहंगों की नाराजगी 16 जून को कर्णप्रयाग में हुई उस घटना को लेकर बताई जा रही है, जिसमें कुछ निहंगों और स्थानीय लोगों के बीच विवाद हुआ था। निहंगों का आरोप है कि उस मामले में गुरुद्वारा प्रबंधन ने उनके पक्ष में कोई आपत्ति या विरोध दर्ज नहीं कराया। इसी असंतोष के चलते उन्होंने नगरासू गुरुद्वारे में पहुंचकर विरोध जताया।

क्यों बढ़ी प्रशासन की चिंता?

यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह की घटनाओं ने प्रशासन की चिंता बढ़ाई हो। हाल के दिनों में सामने आए कुछ विवादों को देखते हुए अधिकारियों ने एहतियातन सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। इसी क्रम में कर्णप्रयाग क्षेत्र में धारा 163 लागू कर भीड़ जुटाने पर प्रतिबंध लगाया गया है।

हेमकुंड साहिब यात्रा जैसे श्रद्धा और आस्था से जुड़े मार्ग पर हुए इस घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह केवल विरोध प्रदर्शन था या इसके पीछे कोई गहरा विवाद है? प्रशासन जांच में जुटा है, जबकि स्थानीय लोग जल्द सामान्य माहौल बहाल होने की उम्मीद कर रहे हैं।