संसद से सड़क तक संग्राम: मॉनसून सत्र के पहले दिन दिल्ली बनी सियासी रणभूमि, ‘चलो संसद’ मार्च पर बवाल

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नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र का पहला दिन सोमवार को राजनीतिक टकराव और सड़क पर उग्र विरोध के नाम रहा। नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के ‘चलो संसद’ मार्च ने राजधानी दिल्ली में माहौल गरमा दिया। संसद मार्ग पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प, आंसू गैस के गोले, लाठीचार्ज, हिरासत और संसद के भीतर लगातार बैठकों के बीच पूरा दिन हाई-वोल्टेज राजनीतिक घटनाक्रम से भरा रहा।

हजारों प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़े, लेकिन सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश के दौरान पुलिस ने उन्हें रोक दिया। हालात बिगड़ने पर आंसू गैस के गोले छोड़े गए और हल्का बल प्रयोग किया गया। प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए विभिन्न स्थानों पर धरना दिया। आंदोलन में छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों के लोगों की भी बड़ी भागीदारी रही।

दिल्ली पुलिस के अनुसार झड़पों में पुलिस और केंद्रीय बलों के 50 से अधिक जवान घायल हुए, जिनमें पांच आईपीएस अधिकारी भी शामिल हैं। करीब 100 लोगों को हिरासत में लिया गया। पुलिस ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानों पर पथराव और सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ की गई। हिंसा में शामिल लोगों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर कई भ्रामक दावे प्रसारित किए गए। कुछ विदेशी, विशेषकर पाकिस्तान से संचालित बताए जा रहे सोशल मीडिया हैंडल्स द्वारा हिंसा और मौतों को लेकर झूठी सूचनाएं फैलाने की कोशिश की गई। पुलिस ने स्पष्ट किया कि इन दावों की जांच की जा रही है।

सरकार और प्रदर्शनकारियों की बातचीत की पहल

दिनभर के तनाव के बीच सीजेपी के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। सरकार की ओर से मांगों पर विचार करने और शीर्ष स्तर पर चर्चा का आश्वासन दिया गया। इसके बाद प्रदर्शनकारियों से आंदोलन समाप्त करने की अपील भी की गई।

संसद के भीतर भी दिनभर चला मंथन

सड़क पर प्रदर्शन के समानांतर संसद भवन में भी लगातार बैठकों का दौर चलता रहा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सहित कई वरिष्ठ मंत्रियों के साथ लंबी बैठक कर हालात और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। हालांकि बैठक को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी साझा नहीं की गई।

विपक्ष ने सरकार को घेरा

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार पर युवाओं की आवाज दबाने का आरोप लगाया। आम आदमी पार्टी सहित कई विपक्षी दलों के नेताओं ने भी प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग की आलोचना की और सरकार से संवाद के जरिए समाधान निकालने की मांग की।

मॉनसून सत्र के पहले ही दिन संसद के भीतर राजनीतिक टकराव और बाहर सड़क पर उग्र प्रदर्शन ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि आने वाले दिनों में शिक्षा, परीक्षा प्रणाली और युवाओं के मुद्दे संसद से लेकर सड़क तक प्रमुख राजनीतिक विषय बने रह सकते हैं।