पहाड़ का प्रचंड रूप: जब चंद पलों में ढह गया पूरा पहाड़, प्रकृति ने फिर दिखाई अपनी ताकत

Spread the love

बागेश्वर। पहाड़ सदियों से जीवन देते आए हैं, लेकिन जब प्रकृति अपना रौद्र रूप दिखाती है तो वही पहाड़ भय का कारण बन जाते हैं। बागेश्वर जिले के कपकोट तहसील अंतर्गत रमाड़ी ग्राम पंचायत के मौनधुरा तोक में हुआ भारी भूस्खलन इसका ताजा उदाहरण है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें देखते ही देखते पहाड़ का बड़ा हिस्सा भरभराकर नीचे गिरता दिखाई देता है। सौभाग्य से इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन बड़ी मात्रा में पेड़-पौधे और वनस्पति मलबे में समा गए।

लगातार हो रही बारिश ने पूरे हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को एक बार फिर उजागर कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बरसात के मौसम में ऐसे हादसों का खतरा बना रहता है और इस बार भी जमीन में लगातार बढ़ रही नमी ने कई स्थानों पर पहाड़ों को कमजोर कर दिया है। ग्रामीणों में भय का माहौल है और वे प्रशासन से संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी की मांग कर रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र स्वाभाविक रूप से भूस्खलन के प्रति संवेदनशील है, लेकिन अनियोजित सड़क निर्माण, अंधाधुंध कटान, जंगलों की कमी और अन्य मानवीय हस्तक्षेप कई स्थानों पर इस खतरे को और बढ़ा देते हैं। जब प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है तो भारी वर्षा जैसी घटनाएं बड़े भूस्खलन का रूप ले सकती हैं।

मौनधुरा की घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि पहाड़ों के साथ विकास का संतुलन बनाए रखना जरूरी है। प्रकृति के नियमों की अनदेखी का असर केवल पर्यावरण पर ही नहीं, बल्कि पहाड़ों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और आजीविका पर भी पड़ता है। ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों में समय रहते वैज्ञानिक निगरानी, सतर्कता और पर्यावरण के अनुकूल विकास कार्य ही भविष्य में होने वाले बड़े नुकसान को कम कर सकते हैं।