डोईवाला। देहरादून जिले के थानो क्षेत्र स्थित जामा मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद सोमवार को उस समय निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया, जब मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मस्जिद परिसर को सील कर दिया। अवैध निर्माण के आरोपों, हाईकोर्ट की सुनवाई, प्रशासनिक नोटिसों और स्थानीय स्तर पर चल रहे विरोध-समर्थन के बीच हुई इस कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है।
दरअसल, यह मामला कोई अचानक हुई कार्रवाई नहीं है। मस्जिद परिसर में कथित रूप से बिना स्वीकृत मानचित्र और अनुमति के निर्माण किए जाने को लेकर पिछले कई महीनों से विवाद चल रहा था। स्थानीय स्तर पर विभिन्न हिंदू संगठन लगातार प्रशासन और एमडीडीए से कार्रवाई की मांग कर रहे थे। उनका आरोप था कि भवन निर्माण नियमों का उल्लंघन किया गया है और नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
मामला तब और महत्वपूर्ण हो गया जब जामा मस्जिद सोसायटी ने एमडीडीए की कार्रवाई को चुनौती देते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। फरवरी 2026 में हुई सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि विवादित निर्माण के लिए प्राधिकरण से कोई औपचारिक अनुमति नहीं ली गई थी और न ही निर्माण को नियमित कराने के लिए कंपाउंडिंग का आवेदन प्रस्तुत किया गया था। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट कहा कि बिना अनुमति निर्माण करने वाला व्यक्ति या संस्था न्यायालय से संरक्षण की अपेक्षा नहीं कर सकती। अदालत ने यह भी कहा कि न्यायालय अवैध निर्माणों को संरक्षण देने का माध्यम नहीं बन सकता।
हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद एमडीडीए ने कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। बताया जाता है कि 27 मई को मस्जिद प्रबंधन को अंतिम नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद सोमवार सुबह प्राधिकरण, प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम थानो क्षेत्र पहुंची और मस्जिद परिसर के विभिन्न हिस्सों के साथ मुख्य प्रवेश द्वार पर भी सील लगा दी।
कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रही। सुबह से ही पुलिस बल तैनात कर दिया गया था ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति को रोका जा सके। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराई गई।
हालांकि कार्रवाई के बाद मस्जिद प्रबंधन और मुस्लिम समुदाय से जुड़े लोगों ने नाराजगी जताई। उनका कहना है कि नोटिस में केवल लगभग 20 गुणा 40 फीट क्षेत्र में बने निर्माण का उल्लेख किया गया था, लेकिन कार्रवाई के दौरान पूरे मस्जिद परिसर को सील कर दिया गया। समुदाय के लोगों का दावा है कि परिसर में स्थित एक कमरा वर्ष 2023 में इमाम के आवास के लिए बनाया गया था और पहले उसी हिस्से को सील किया गया था। उनका सवाल है कि पूरे धार्मिक परिसर को बंद करने की आवश्यकता क्यों पड़ी।
भूमि दान करने का दावा करने वाले स्थानीय निवासी दिलशाद ने कहा कि यह स्थान वर्षों से क्षेत्र के लोगों के धार्मिक उपयोग में रहा है। उनके अनुसार अचानक पूरे परिसर को सील किए जाने से लोगों में असमंजस और नाराजगी पैदा हुई है।
वहीं दूसरी ओर, लंबे समय से कार्रवाई की मांग कर रहे हिंदू संगठनों ने एमडीडीए की कार्रवाई का स्वागत किया। बजरंग दल और अन्य संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि कानून सबके लिए समान होना चाहिए और अवैध निर्माण चाहे किसी भी समुदाय का हो, उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। कार्रवाई के बाद थानो चौक के पास कुछ संगठनों ने हवन-यज्ञ कर प्रशासन के कदम का समर्थन भी किया।
कार्रवाई के दौरान स्थानीय व्यापारियों ने भी समर्थन स्वरूप थानो बाजार बंद रखा। दिनभर क्षेत्र में लोग समूहों में इस कार्रवाई और इसके प्रभावों पर चर्चा करते दिखाई दिए।
सीलिंग के बाद विवाद ने नया मोड़ तब लिया जब क्षेत्र पंचायत सदस्य महिपाल सिंह कृषाली ने आरोप लगाया कि मस्जिद के समीप से गुजरते समय कुछ लोगों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। सूचना मिलने के बाद कुछ संगठनों के कार्यकर्ता आक्रोशित हो गए और मौके की ओर बढ़ने लगे। हालांकि पुलिस और प्रशासन ने तत्काल हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित कर लिया। अधिकारियों ने शिकायत की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
फिलहाल जामा मस्जिद परिसर सील है और मामला प्रशासनिक तथा कानूनी स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। एक पक्ष इसे अवैध निर्माण के खिलाफ कानूनसम्मत कार्रवाई बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष कार्रवाई की प्रक्रिया और दायरे पर सवाल उठा रहा है। लेकिन इतना तय है कि हाईकोर्ट की टिप्पणी और एमडीडीए की कार्रवाई के बाद यह मामला अब उत्तराखंड में अवैध निर्माणों पर हो रही कार्रवाई की बड़ी मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

