मां की गोद में सोए थे दोनों मासूम… तड़के कमरे में घुसा मौत का सौदागर, एक बेटे की सांसें छीन ले गया, बेटी अब भी जिंदगी से लड़ रही है

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झांसी। रविवार की रात इस परिवार के लिए हर रात की तरह ही थी। मजदूरी करने वाले प्रदीप कुशवाहा काम पर निकल चुके थे। घर के एक कमरे में उनकी पत्नी नेहा अपने दोनों बच्चों—सात वर्षीय मयंक और चार वर्षीय प्रगति—को सीने से लगाकर सो रही थीं। किसी को जरा भी अंदाजा नहीं था कि उसी कमरे में एक जहरीला सांप भी घुस चुका है और कुछ ही मिनटों बाद यह परिवार ऐसी त्रासदी का शिकार होगा, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकेगी।

यह दर्दनाक घटना उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के बड़ागांव थाना क्षेत्र के हरदौलपुर मोहल्ले की है। तड़के करीब साढ़े तीन बजे अचानक चार वर्षीय प्रगति दर्द से चीख उठी। बेटी की आवाज सुनकर मां नेहा की नींद खुली। उन्होंने उसे गोद में उठाया, लेकिन वह दर्द से तड़प रही थी। नेहा अभी कुछ समझ पातीं, इससे पहले बगल में सो रहा सात वर्षीय मयंक भी जोर-जोर से रोने लगा।

परिजनों ने कमरे में देखा तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। कमरे में एक जहरीला सांप मौजूद था, जो दोनों बच्चों को डस चुका था। घर में अफरा-तफरी मच गई। पड़ोसी भी दौड़ पड़े। किसी ने पिता प्रदीप को फोन किया तो किसी ने वाहन की व्यवस्था की। दोनों बच्चों को तत्काल झांसी मेडिकल कॉलेज ले जाया गया।

अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने दोनों बच्चों का इलाज शुरू कर दिया। मां नेहा लगातार डॉक्टरों से हाथ जोड़कर अपने बच्चों को बचाने की गुहार लगाती रहीं। लेकिन कुछ ही देर बाद डॉक्टरों ने सात वर्षीय मयंक को मृत घोषित कर दिया। यह खबर सुनते ही मां फूट-फूटकर रो पड़ीं। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में उनकी चीखें गूंज उठीं। वह बार-बार भगवान से सिर्फ एक ही प्रार्थना करती रहीं—”हे भगवान… मेरा बेटा तो चला गया, अब मेरी बेटी को बचा लो।” वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें यह दृश्य देखकर नम हो गईं।

दूसरी ओर चार वर्षीय प्रगति की हालत गंभीर बनी हुई है। डॉक्टर उसकी लगातार निगरानी कर रहे हैं और उसे बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। पूरे परिवार की उम्मीदें अब उसी पर टिकी हैं।

परिजनों ने बताया कि प्रदीप और नेहा के केवल दो ही बच्चे थे—एक बेटा और एक बेटी। अब बेटा हमेशा के लिए इस दुनिया से चला गया है, जबकि बेटी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही है। जिस घर में कुछ घंटे पहले तक बच्चों की हंसी गूंज रही थी, वहां अब मातम पसरा हुआ है। आंगन में पड़े खिलौने और स्कूल बैग अपने छोटे मालिक का इंतजार करते रह गए।

मृतक के ताऊ हरचरण कुशवाहा ने बताया कि पिता के काम पर जाने के बाद सांप कमरे में घुस आया। पहले उसने प्रगति को डसा। बच्ची के रोने पर मां उसे लेकर बाहर आईं, लेकिन कुछ ही मिनट बाद मयंक भी दर्द से चीखने लगा। जब तक दोनों बच्चों को अस्पताल पहुंचाया गया, तब तक मयंक की हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। घटना के बाद सांप मकान में बने एक सुराख में घुस गया। काफी तलाश और खुदाई के बावजूद वह नहीं मिला।

घटना के बाद पूरे हरदौलपुर मोहल्ले में दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दो-तीन दिन पहले भी इसी कमरे में एक सांप निकला था, जिसे ग्रामीणों ने मार दिया था। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि सांप के बदला लेने जैसी मान्यताओं का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, बच्चों को जिस सांप ने काटा वह संभवतः करैत था, जिसे भारत के सबसे विषैले सांपों में गिना जाता है। इसका जहर सीधे तंत्रिका तंत्र पर असर करता है और कई बार शुरुआत में दर्द या सूजन भी नहीं होती, जिससे इलाज में देरी जानलेवा साबित हो सकती है।

फिलहाल पूरे मोहल्ले की दुआएं चार वर्षीय प्रगति के साथ हैं। हर कोई यही प्रार्थना कर रहा है कि जिस मां ने एक ही रात में अपना बेटा खो दिया, उसे अपनी बेटी को खोने का दर्द न सहना पड़े।