डेढ़ लाख की शिकायत से शुरू हुई सियासत, फिर छात्रा के दूसरे वीडियो ने बदला पूरा मामला

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के सामने एक छात्रा द्वारा इंटरनेशनल ताइक्वांडो प्रतियोगिता में जाने के लिए डेढ़ लाख रुपये मांगे जाने की शिकायत के बाद शुरू हुआ मामला अब राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। पहले छात्रा के भावुक होकर अपनी समस्या बताने का वीडियो सामने आया, जिसके बाद कांग्रेस ने सरकार और खेल व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। लेकिन इसके बाद छात्रा का दूसरा वीडियो सामने आया, जिसमें उसने कहा कि कार्यक्रम में वह अपनी पूरी बात नहीं रख पाई थी और इंटरनेशनल इवेंट में नहीं जा पाने की वजह कुछ अलग थी।

दरअसल, 10 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवा सदन में आयोजित ‘मुख्यमंत्री युवा विद्यार्थी मंथन’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री धामी छात्र-छात्राओं से संवाद कर रहे थे। इसी दौरान 12वीं की एक छात्रा ने बताया कि वह जम्मू में ताइक्वांडो की राष्ट्रीय प्रतियोगिता में गई थी और वहां गोल्ड मेडल जीतने के बाद उसका चयन इंटरनेशनल इवेंट के लिए हुआ था।

छात्रा ने मुख्यमंत्री के सामने कहा कि इंटरनेशनल प्रतियोगिता में जाने के लिए उससे डेढ़ लाख रुपये मांगे गए, जिसके कारण वह प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले सकी। छात्रा की बात सुनकर मुख्यमंत्री ने उसे बैठने के लिए कहा और अधिकारियों को उसका नाम नोट कर मामले को दिखवाने के निर्देश दिए।

इसके बाद छात्रा का यह वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया तो मामला तेजी से राजनीतिक रंग लेने लगा। कांग्रेस ने इसे सरकार की खेल नीति और खिलाड़ियों को मिलने वाली सुविधाओं से जोड़ते हुए सवाल उठाए। कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता प्रतिमा सिंह ने आरोप लगाया कि अगर मुख्यमंत्री के सामने ही छात्रा की शिकायत पर तत्काल जांच के निर्देश दिए जाते तो यह भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की गंभीरता का उदाहरण होता।

कांग्रेस ने छात्रा के बाद में सामने आए दूसरे वीडियो पर भी सवाल उठाए। पार्टी का दावा रहा कि दूसरे वीडियो में छात्रा दबाव में दिखाई दे रही है और उससे सफाई दिलवाई गई है। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि आखिर मुख्यमंत्री के सामने शिकायत करने के बाद छात्रा को दोबारा वीडियो जारी कर अपनी बात स्पष्ट करने की जरूरत क्यों पड़ी?

लेकिन यहीं से कहानी ने नया मोड़ ले लिया।

छात्रा ने अपने दूसरे वीडियो में कहा कि 10 अगस्त के कार्यक्रम में वह अपनी पूरी बात नहीं बता पाई थी। उसके अनुसार, जम्मू में नेशनल प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने के बाद उसका इंटरनेशनल इवेंट के लिए चयन हुआ था। इस प्रतियोगिता के लिए फेडरेशन की ओर से उसे एक लाख 70 हजार रुपये दिए जा रहे थे, जबकि बाकी खर्च उसे स्वयं उठाना था। छात्रा ने बताया कि उसने इस आर्थिक स्थिति की जानकारी किसी को नहीं दी और इसी कारण वह इंटरनेशनल प्रतियोगिता में नहीं जा सकी।

इस बयान के बाद पहले और दूसरे वीडियो को लेकर कई सवाल खड़े हो गए। पहला सवाल था कि आखिर छात्रा से डेढ़ लाख रुपये किसने मांगे थे? दूसरा यह कि यदि फेडरेशन की ओर से एक लाख 70 हजार रुपये दिए जा रहे थे तो पूरी आर्थिक समस्या क्या थी? और तीसरा सवाल यह कि छात्रा ने पहले मुख्यमंत्री के सामने अपनी बात किस संदर्भ में रखी और बाद में उसका स्पष्टीकरण क्यों आया?

इसी बीच भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को राजनीतिक करार दिया। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने छात्रा की बात गंभीरता से सुनी और मामले को नोट कर अधिकारियों से दिखवाने की बात कही थी। भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस बिना पूरे तथ्यों की जानकारी के मामले को राजनीतिक मुद्दा बना रही है।

मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने संबंधित स्कूल से जानकारी ली। इसमें सामने आया कि छात्रा ने प्रतियोगिता में स्कूल की ओर से नहीं, बल्कि एक निजी एसोसिएशन के माध्यम से प्रतिभाग किया था। विभागीय स्तर पर यह भी कहा गया कि छात्रा की प्रतिभा को देखते हुए स्कूल की ओर से हरसंभव मदद की जाएगी।

यानी एक छात्रा की इंटरनेशनल प्रतियोगिता में नहीं जा पाने की बात से शुरू हुआ मामला अब तीन अलग-अलग सवालों के बीच खड़ा है—पहले बयान में डेढ़ लाख रुपये की मांग, दूसरे बयान में फेडरेशन से एक लाख 70 हजार रुपये मिलने की जानकारी और इसके बाद कांग्रेस-भाजपा के बीच शुरू हुई सियासत।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि छात्रा इंटरनेशनल प्रतियोगिता में आखिर क्यों नहीं जा सकी और आर्थिक मदद की व्यवस्था में कमी कहां रही। क्योंकि मामला सिर्फ एक छात्रा का नहीं, बल्कि उन खिलाड़ियों के लिए व्यवस्था की भी परीक्षा है जो राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बाद अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का सपना देखते हैं।