
हल्द्वानी। ज्योलीकोट क्षेत्र में काम करने वाले 26 वर्षीय अमन सोनकर उर्फ सौरभ की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों का आरोप है कि हालत बिगड़ने पर उसे नैनीताल के बीडी पांडे अस्पताल से हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन वहां घंटों तक बेड नहीं मिल सका। देर रात भर्ती होने के बाद सुबह अमन की मौत हो गई।
कैलाखान निवासी अमन मेहनत-मजदूरी करता था और लंबे समय से ज्योलीकोट में ठेकेदार के अधीन काम कर रहा था। परिजनों के मुताबिक अगस्त में ज्योलीकोट में रहते हुए उसकी तबीयत खराब हुई थी। जांच में पीलिया की पुष्टि हुई थी। उपचार के बाद हालत में सुधार होने पर उसे छुट्टी दे दी गई थी।
मंगलवार को अमन को दोबारा तेज बुखार और तबीयत बिगड़ने की शिकायत हुई। साथ काम करने वाले मजदूर उसे बीडी पांडे अस्पताल लेकर पहुंचे। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया। इसके बाद परिजन उसे सुशीला तिवारी अस्पताल ले गए।
परिजनों का आरोप है कि रात करीब दो बजे तक बेड नहीं मिल पाया। देर से भर्ती किए जाने के बाद भी अमन की हालत नहीं संभली और कुछ ही घंटों बाद उसने दम तोड़ दिया। मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया।
अमन के भाई संजय सोनकर ने अस्पताल में समय पर बेड नहीं मिलने का आरोप लगाया है। वहीं, सीएमओ डा. रश्मि पंत ने बताया कि युवक के पुराने और मंगलवार के उपचार संबंधी दस्तावेज मंगाकर जांच की जा रही है।
सीएमओ के अनुसार, रिकॉर्ड में युवक के एल्कोहल विड्राल और उससे जुड़ी समस्या का उल्लेख मिला है। मंगलवार शाम करीब सात बजे बीडी पांडे अस्पताल की इमरजेंसी में दिखाए जाने के बाद इसी समस्या के आधार पर उसे हायर सेंटर रेफर किया गया था।
हालांकि, सुशीला तिवारी अस्पताल में बेड उपलब्ध नहीं होने के परिजनों के आरोपों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। अधिकारियों से पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अमन को उपचार मिलने में कितनी देरी हुई और उसकी मौत के पीछे वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या रहे।




