हाई कोर्ट के फैसले से 3100 से अधिक एलटी शिक्षकों की पदोन्नति का रास्ता साफ, वरिष्ठता विवाद पर लगा पूर्ण विराम

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नैनीताल। उत्तराखंड हाई कोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा विभाग के हजारों एलटी ग्रेड शिक्षकों और प्रवक्ताओं से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे वरिष्ठता विवाद पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि एक अक्टूबर 1990 से पहले तदर्थ आधार पर नियुक्त एलटी ग्रेड शिक्षकों और प्रवक्ताओं की सेवाएं एक अक्टूबर 1990 से नियमित मानी जाएंगी। इसी तिथि से उनकी वरिष्ठता भी प्रभावी होगी।

अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार समेत संबंधित पक्षों की याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि इस विवाद पर पहले भी न्यायालय निर्णय दे चुका है और बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने भी उस फैसले को बरकरार रखा था। ऐसे में इस मुद्दे पर दोबारा विचार करने की आवश्यकता नहीं है।

इस निर्णय का सबसे बड़ा लाभ प्रदेश के 3100 से अधिक एलटी ग्रेड शिक्षकों को मिलेगा, जिनकी प्रवक्ता पद पर पदोन्नति लंबे समय से वरिष्ठता विवाद के कारण अटकी हुई थी। अब विभाग के लिए पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने न्यायालय को बताया कि नवंबर 2025 में संशोधित वरिष्ठता सूची जारी की जा चुकी है। इसके तहत गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के सैकड़ों एलटी ग्रेड शिक्षकों तथा प्रवक्ताओं को एक अक्टूबर 1990 से नियमितीकरण और वरिष्ठता का लाभ प्रदान किया गया है। अदालत ने माना कि संबंधित प्राधिकरणों ने पूर्व के न्यायिक आदेशों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई पूरी कर दी है।

हाई कोर्ट के इस फैसले को माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए अहम माना जा रहा है। इससे वर्षों से लंबित वरिष्ठता विवाद समाप्त होने के साथ ही पदोन्नति प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद है। शिक्षकों के संगठन भी लंबे समय से इस मामले के अंतिम समाधान की मांग कर रहे थे, जिसे अब न्यायालय के फैसले से स्पष्ट दिशा मिल गई है।