प्राकृतिक आपदा का कहर: वायनाड में भूस्खलन, बिहार का युवक लापता; परिवार की उम्मीदें बचाव दल पर टिकीं

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लगातार बारिश से ढही पहाड़ी, तीन लोगों की मौत की पुष्टि, सात श्रमिक लापता; क्रेन चालक इमरान की तलाश जारी

केरल के पहाड़ी जिले वायनाड में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की भयावह तस्वीर सामने ला दी। सड़क निर्माण परियोजना के पास अचानक पहाड़ी का बड़ा हिस्सा ढह गया, जिससे वहां काम कर रहे कई श्रमिक मलबे की चपेट में आ गए। हादसे में तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि सात श्रमिक अब भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में बिहार के सारण जिले के 30 वर्षीय मोहम्मद इमरान भी शामिल हैं।

जानकारी के अनुसार, इमरान रोज़गार की तलाश में लंबे समय से केरल में रहकर सड़क निर्माण परियोजना में क्रेन चालक के रूप में काम कर रहे थे। हादसे के बाद से उनका कोई सुराग नहीं मिला है। घटना की सूचना मिलते ही सारण जिले के उनके गांव में चिंता और बेचैनी का माहौल है। परिवार लगातार प्रशासन और परिचितों के संपर्क में है तथा इमरान के सुरक्षित लौटने की दुआ कर रहा है।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भारी बारिश के कारण पहाड़ी की मिट्टी और चट्टानें कमजोर हो गई थीं। अचानक पहाड़ी का बड़ा हिस्सा भरभराकर नीचे आ गया और कार्यस्थल पर मौजूद मजदूरों को संभलने का मौका भी नहीं मिला। कुछ श्रमिक सुरक्षित बाहर निकल आए, लेकिन कई लोग मलबे में दब गए।

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हादसे के तुरंत बाद राहत एवं बचाव दल मौके पर पहुंच गया। जेसीबी मशीनों और अन्य संसाधनों की मदद से मलबा हटाने का अभियान लगातार जारी है। खराब मौसम और लगातार बारिश बचाव कार्य में बड़ी चुनौती बनी हुई है, फिर भी लापता श्रमिकों की तलाश युद्धस्तर पर की जा रही है।

गांव में इमरान के परिजन हर फोन कॉल और हर नई सूचना का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। स्थानीय लोग भी परिवार के साथ खड़े हैं और उनके सकुशल मिलने की प्रार्थना कर रहे हैं।

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प्राकृतिक आपदा का मानव जीवन पर प्रभाव और उसका कारण

यह घटना बताती है कि प्राकृतिक आपदाओं का मानव जीवन पर कितना गहरा प्रभाव पड़ता है। ऐसी घटनाओं में न केवल जान-माल का नुकसान होता है, बल्कि परिवारों का भविष्य, आजीविका और मानसिक संतुलन भी प्रभावित होता है। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार और अत्यधिक वर्षा होने से मिट्टी की पकड़ कमजोर हो जाती है, जिससे भूस्खलन की आशंका कई गुना बढ़ जाती है। अनियोजित निर्माण, पहाड़ों की कटाई, वनों की कमी और जलवायु परिवर्तन जैसी परिस्थितियां भी ऐसे हादसों के जोखिम को बढ़ाने वाले प्रमुख कारण मानी जाती हैं।

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