रुद्रप्रयाग। उत्तराखंड के पौराणिक और आस्था के प्रमुख केंद्र त्रियुगीनारायण मंदिर से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है। यहां 19 अप्रैल 2026 को हरियाणा न्यायिक सेवा में कार्यरत जज प्रियंका वर्मा और फरीदाबाद निवासी अधिवक्ता प्रशांत ने पूर्णतः सादगी, वैदिक परंपराओं और बिना दहेज के विवाह कर समाज के सामने एक आदर्श प्रस्तुत किया।
शिव-पार्वती के विवाह स्थल पर रचे सात फेरे
यह विवाह इसलिए भी खास रहा क्योंकि जिस पवित्र स्थल पर यह संपन्न हुआ, उसी त्रियुगीनारायण मंदिर में पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह हुआ था। इसी धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक जुड़ाव के चलते इस स्थान का चयन किया गया।
38 मेहमानों की मौजूदगी में संपन्न हुआ विवाह
विवाह समारोह पूरी तरह सादगीपूर्ण रहा। इसमें कुल 38 लोग शामिल हुए, जिनमें वधू पक्ष से 13 और वर पक्ष से 25 सदस्य मौजूद रहे। समारोह में न तो भव्य सजावट की गई, न डीजे और न ही आतिशबाजी—सिर्फ पारंपरिक विधि-विधान और पारिवारिक गरिमा को प्राथमिकता दी गई।

न्यायिक और विधि क्षेत्र से जुड़े हैं दोनों
दुल्हन प्रियंका वर्मा हरियाणा न्यायिक सेवा में जज के पद पर कार्यरत हैं और वर्तमान में फरीदाबाद में सेवाएं दे रही हैं। वहीं उनके जीवनसाथी प्रशांत पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में अधिवक्ता हैं और जींद जिले के सफीदों के निवासी हैं। दोनों शिक्षित और जागरूक परिवारों से ताल्लुक रखते हैं।
परिवार की सोच बनी प्रेरणा
प्रियंका वर्मा के पिता डॉ. अशोक कुमार वर्मा हरियाणा पुलिस में उप-निरीक्षक हैं और उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया जा चुका है। वे लंबे समय से दहेज प्रथा के विरोधी रहे हैं और समाज में इसके खिलाफ जागरूकता अभियान चलाते रहे हैं। उनकी इसी सोच का असर इस विवाह में साफ दिखाई दिया, जहां पूरी तरह दहेज-मुक्त और सादगीपूर्ण आयोजन किया गया।
समाज को मिला सकारात्मक संदेश
यह विवाह सिर्फ एक पारिवारिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज के लिए एक मजबूत संदेश बनकर उभरा है। आज के दौर में जहां शादियों में दिखावा और फिजूलखर्ची आम हो गई है, वहीं यह पहल सादगी, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण पेश करती है।
यदि समाज के अन्य परिवार भी इस तरह के कदम उठाएं, तो दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों को समाप्त करने की दिशा में यह एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।

