अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े चढ़ावे को लेकर उठे विवाद ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। मामला उस वक्त सुर्खियों में आया जब मंदिर में दानपात्रों से निकली राशि की गिनती करने वाले कर्मचारियों पर अनियमितता के आरोप लगे और जांच एजेंसियों ने कार्रवाई शुरू की।
इस पूरे प्रकरण में सबसे ज्यादा चर्चा लवकुश मिश्रा के नाम की हो रही है। लवकुश मिश्रा मंदिर में चढ़ावे की राशि की गिनती से जुड़े कार्य में तैनात था। जांच के दौरान जब टीम उसके घर पहुंची तो वहां से करीब 10 लाख रुपये नकद मिलने की बात सामने आई। जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कुछ रकम घर की अलमारी में रखी मिली, जबकि कुछ नकदी कथित तौर पर गोबर के ढेर में छिपाकर रखी गई थी। इसी खुलासे ने मामले को और अधिक सनसनीखेज बना दिया।
जांच एजेंसियों का ध्यान तब और बढ़ गया जब कम वेतन पाने वाले कर्मचारियों की संपत्तियों को लेकर सवाल उठने लगे। बताया जा रहा है कि करीब 18 से 20 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के नाम पर लाखों और करोड़ों रुपये की संपत्तियां सामने आई हैं। जांच में यह भी चर्चा है कि एक कर्मचारी ने लगभग डेढ़ करोड़ रुपये मूल्य की जमीन खरीदी, जबकि दूसरे कर्मचारी के नाम पर करीब 40 लाख रुपये का प्लॉट होने की जानकारी सामने आई है।
मामले में लवकुश मिश्रा के अलावा एक अन्य कर्मचारी से भी पूछताछ की जा रही है। हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी तक सभी संदिग्धों की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है। इसलिए किसी को दोषी ठहराना अभी जल्दबाजी होगी।
उधर, लवकुश मिश्रा के पिता बच्चूलाल ने बेटे का बचाव करते हुए दावा किया है कि बरामद नकदी का संबंध किसी गड़बड़ी से नहीं है। उनका कहना है कि परिवार ने कृषि भूमि गिरवी रखकर धन जुटाया था और संपत्ति को लेकर जो दावे किए जा रहे हैं, उनकी भी पूरी सच्चाई सामने आनी बाकी है।
मामले के राजनीतिक तूल पकड़ने के बाद विपक्ष ने भी सवाल उठाए। विपक्षी पार्टी न सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को उठाते हुए चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच की मांग की। इसके बाद मामला और गर्मा गया।
बढ़ते विवाद और आस्था से जुड़े संवेदनशील पहलू को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर दिया है। जांच की जिम्मेदारी वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को सौंपी गई है। टीम को निर्धारित समय सीमा में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह मामला कुछ कर्मचारियों तक सीमित है या फिर जांच में कोई बड़ी साजिश सामने आएगी? गोबर के ढेर में मिली नकदी, कम आय में करोड़ों की संपत्ति और चढ़ावे के पैसों को लेकर उठे सवालों ने श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ा दी है।
अब सभी की निगाहें SIT की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, क्योंकि यह मामला सिर्फ पैसों का नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा हुआ है।

