उत्तराखंड को विकास की ओर ले जाने के दावों के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अपने विधानसभा क्षेत्र चंपावत से सामने आई यह तस्वीर व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। तल्लादेश के बकोड़ा गांव में सड़क नहीं होने के कारण 80 वर्षीय दीवान सिंह को इलाज के लिए ग्रामीणों ने डंडे में बांधकर करीब 8 किलोमीटर पैदल सड़क तक पहुंचाया। बारिश के बीच चार ग्रामीण बारी-बारी से बुजुर्ग को कंधा देते रहे और करीब दो घंटे बाद उन्हें सीम गांव की सड़क तक पहुंचाया जा सका।
दीवान सिंह के पैर में छह दिन पहले कुछ चुभ गया था। दर्द बढ़ने पर शनिवार को इलाज के लिए अस्पताल ले जाने की नौबत आई, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों के सामने मरीज को पैदल सड़क तक ले जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। इसके बाद सीम से जीप के जरिए उन्हें करीब 35 किलोमीटर दूर टनकपुर उपजिला चिकित्सालय पहुंचाया गया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। ग्रामीणों के मुताबिक बकोड़ा में बीमार और घायल लोगों को आए दिन इसी तरह डोली या डंडे के सहारे सड़क तक पहुंचाना पड़ता है।
मंच-मोस्टा-बकोड़ा सड़क वर्ष 2012 में स्वीकृत हुई थी, लेकिन वन अनापत्ति के कारण इसका निर्माण आज तक शुरू नहीं हो सका। वर्ष 2025 में डीएम मनीष कुमार ने डीपीआर तैयार करने और वन संबंधी प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए थे।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क न होने से केवल इलाज ही मुश्किल नहीं है, बल्कि क्षेत्र से पलायन भी बढ़ रहा है। मोस्टा-बकोड़ा, अकेड़ी और ग्वानी समेत आसपास के गांवों की 500 से अधिक आबादी को सड़क बनने से सीधा लाभ मिल सकता है।
पीएमजीएसवाई के चंपावत खंड के ईई वीरेंद्र सिंह बोहरा के अनुसार 22.30 किलोमीटर लंबी सड़क की औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। 18.30 करोड़ रुपये की डीपीआर स्वीकृति के लिए भारत सरकार को भेजी गई है और वन प्रस्ताव भी अपलोड किया जा चुका है। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण शुरू किया जाएगा।



