राखी के बहाने ‘भाई’ बने धामी, चुनाव से पहले मातृशक्ति साधने की तैयारी?

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देहरादून। रक्षाबंधन के मंच से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद को मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि बहनों का ‘भाई’ बताया। पर्व के लिहाज से यह भावनात्मक संबोधन है, लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले इसके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। सवाल यह है कि क्या राखी के बहाने सरकार महिला मतदाताओं के साथ अपना भावनात्मक जुड़ाव मजबूत करने की कोशिश कर रही है?

धामी ने समारोह में महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता की बात की। साथ ही 28 और 29 अगस्त को महिलाओं के लिए रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा की घोषणा की। यानी राखी के भावनात्मक रिश्ते के साथ सरकार की ओर से ऐसी सौगात भी दी गई, जिसका सीधा लाभ महिलाओं को मिलना है।

देहरादून में आयोजित समारोहों में बड़ी संख्या में महिलाओं की मौजूदगी और मुख्यमंत्री की कलाई पर राखियां बांधने की तस्वीरें भी राजनीतिक संदेश देती नजर आईं। महिला मतदाताओं की चुनाव में महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए सरकार का यह संवाद महज त्योहार तक सीमित है या इसके पीछे चुनावी रणनीति भी है, इस पर चर्चा स्वाभाविक है।

खास बात यह रही कि रक्षाबंधन के मंच से मुख्यमंत्री ने रोजगार, महिलाओं की सुरक्षा और सरकार की उपलब्धियां भी गिनाईं। यानी पर्व का मंच भावनात्मक जुड़ाव के साथ सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश करने का माध्यम भी बन गया।

राजनीति में समय और संदेश दोनों मायने रखते हैं। चुनाव से पहले महिलाओं के बीच ‘भाई’ की छवि, सुरक्षा का भरोसा और मुफ्त यात्रा जैसी घोषणा, इन तीनों को एक साथ देखें तो सरकार की मातृशक्ति तक सीधी पहुंच बनाने की कवायद साफ दिखाई देती है।