अयोध्या। राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे को लेकर सामने आए कथित गड़बड़ी के मामले में जांच अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक जांच के बाद आठ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, जबकि दो आरोपियों को गिरफ्तार भी किया गया है। मामले में करोड़ों रुपये के चढ़ावे में कथित हेराफेरी के आरोप हैं और जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब मंदिर में आने वाले दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर सवाल उठे। आरोप लगाए गए कि दानपात्रों में जमा होने वाली रकम और रिकॉर्ड में अंतर है। इसके बाद शिकायतें सामने आईं और उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी। जांच के दौरान दान की गिनती, बैंक में जमा होने वाली राशि और रिकॉर्ड का मिलान किया गया।
कितने रुपये की हेराफेरी का आरोप?
मामले में अलग-अलग दावे सामने आए हैं। शुरुआती आरोपों में 5 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये तक की रकम के गायब होने की बात कही गई। वहीं कुछ रिपोर्टों में इससे कहीं बड़ी राशि की भी चर्चा हुई है। हालांकि अब तक जांच एजेंसियों ने किसी निश्चित रकम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। इसलिए वास्तविक राशि का खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा।
एसआईटी ने मंदिर के दान प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों, सेवादारों और अन्य लोगों से पूछताछ की। जांच के दौरान बड़ी संख्या में दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की गई। कुछ आरोपियों के ठिकानों से नकदी और अन्य सामग्री बरामद होने की भी जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित गड़बड़ी कब से चल रही थी और इसमें कौन-कौन शामिल था।

किन लोगों पर हुई कार्रवाई?
एफआईआर में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं उनमें मुख्य आरोपी रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, मनीष यादव, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, करुणेश पांडे और एक अन्य आरोपी शामिल हैं। इनमें से कई लोग मंदिर में दान की गिनती और उससे जुड़े कार्यों में लगे हुए थे।
जांच में सामने आया है कि आरोपियों में से छह लोग मंदिर में दान की गिनती और चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़े कार्यों में लगे थे। मुख्य आरोपी टिन्नू यादव को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का चालक बताया गया है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि दानपात्रों की चाबियों और चढ़ावे की निगरानी व्यवस्था तक किस-किस की पहुंच थी।
फिलहाल क्या कार्रवाई चल रही है?
ट्रस्ट की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अन्य आरोपियों की भूमिका की जांच जारी है। एसआईटी अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही है और वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक लेनदेन तथा सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया जा रहा है। जांच एजेंसियों का कहना है कि यदि और लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो कार्रवाई का दायरा बढ़ाया जाएगा।


