मम्मी, मुझे चोर कहते हैं…” 12 साल की छात्रा की मौत, पड़ोसियों के तानों से परेशान थी बच्ची, परिवार का आरोप

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कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के गोविंद नगर क्षेत्र से एक बेहद मार्मिक घटना सामने आई है। यहां कक्षा 8 में पढ़ने वाली 12 वर्षीय छात्रा की मौत के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। परिजनों का आरोप है कि बच्ची पिछले कुछ दिनों से मानसिक तनाव में थी और इसकी वजह पड़ोसियों द्वारा लगातार लगाए जा रहे आरोप और ताने थे।

मृतक छात्रा दिव्यांशी अपनी मां माधुरी के साथ रतनलाल नगर इलाके में रहती थी। परिवार के अनुसार, कुछ दिन पहले वह मोहल्ले के बच्चों के साथ खेल रही थी। इसी दौरान वह पड़ोसी के घर में रखा एक जेवर उठा लाई। परिजनों का कहना है कि बच्ची को यह नहीं पता था कि वह सोने का जेवर है और उसने इसे खेल-खेल में उठा लिया था।

जब पड़ोसी को जेवर नहीं मिला तो उन्होंने इसकी जानकारी आसपास के लोगों को दी। बाद में दिव्यांशी ने खुद अपनी मां को पूरी बात बताई। इसके बाद मां ने उसे समझाया और पड़ोसी का जेवर तुरंत वापस कर दिया गया। परिवार का कहना है कि बच्ची ने सभी के सामने यह भी बताया था कि उसने जानबूझकर ऐसा नहीं किया था और उसे जेवर की कीमत या महत्व का अंदाजा नहीं था।

परिजनों के मुताबिक, मामला खत्म होने के बावजूद कुछ पड़ोसी लगातार बच्ची को “चोर” कहकर पुकारते रहे। जब भी वह घर से बाहर निकलती या मोहल्ले में दिखाई देती, उसे ताने सुनने पड़ते थे। परिवार का आरोप है कि इन बातों का उसकी मासूम मानसिकता पर गहरा असर पड़ने लगा था। वह अक्सर उदास रहने लगी थी और कई बार अपनी मां से शिकायत करती थी कि लोग उसे गलत समझ रहे हैं।

मां माधुरी ने बताया कि घटना वाले दिन भी बच्ची सामान्य दिखाई दे रही थी, लेकिन उसने एक बार फिर कहा था कि मोहल्ले के लोग उसे चोर कहते हैं और यह बात उसे बहुत दुख पहुंचाती है। परिवार को अंदाजा नहीं था कि वह अंदर ही अंदर इतना तनाव झेल रही है।

बाद में जब मां काम से घर लौटी तो उन्हें बेटी की मौत की जानकारी मिली। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की गई। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच की जा रही है।

गोविंद नगर क्षेत्र के एसीपी दिलीप सिंह ने बताया कि प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। परिजनों और स्थानीय लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि बच्चों के साथ व्यवहार करते समय संवेदनशीलता और जिम्मेदारी कितनी जरूरी है। छोटी उम्र में लगातार अपमान, ताने या सामाजिक दबाव बच्चों के मन पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं, जिसके परिणाम कई बार बेहद दुखद साबित होते हैं।