राजौरी के दुर्गम जंगलों में कर्तव्य निभाते हुए शहीद हुए लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी, सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

Spread the love

अल्मोड़ा। अल्मोड़ा जिले के पांडेखोला निवासी लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी का नाम अब उत्तराखंड के उन वीर सपूतों में शामिल हो गया है, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। महज 25 वर्ष की आयु में उन्होंने जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में चल रहे आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

जानकारी के अनुसार, लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी अपनी यूनिट के साथ राजौरी के मंजाकोट क्षेत्र में ऑपरेशन के तहत तैनात थे। घने जंगलों, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों और गहरी खाइयों वाले इस क्षेत्र में सुरक्षा बल आतंकियों की तलाश में अभियान चला रहे थे। ड्यूटी के दौरान वह एक गहरी खाई में गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। साथी जवानों ने तत्काल उनका रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन उपचार के दौरान उनका निधन हो गया।

शहादत की खबर मिलते ही पूरे अल्मोड़ा समेत उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई। रविवार को उनका पार्थिव शरीर सेना के हेलीकॉप्टर से अल्मोड़ा लाया गया, जहां सेना, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। तिरंगे में लिपटे अपने वीर बेटे के अंतिम दर्शन के लिए लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा और माहौल गमगीन हो गया।

इसके बाद पार्थिव शरीर को विश्वनाथ घाट ले जाया गया, जहां सैन्य परंपराओं के अनुरूप उनका अंतिम संस्कार किया गया। भारतीय सेना ने गार्ड ऑफ ऑनर और अंतिम सलामी देकर अपने युवा अधिकारी को विदाई दी। भारत माता की जय के नारों के बीच सैकड़ों नम आंखों ने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी।

कम उम्र में सेना में अधिकारी बनकर देश सेवा का सपना पूरा करने वाले लेफ्टिनेंट बीरेश्वर गोस्वामी का बलिदान उत्तराखंड के लिए गर्व और दुख दोनों का विषय है। उनका साहस, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्र के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा।