देहरादून। उत्तराखंड की लोक संस्कृति, लोक संगीत और क्षेत्रीय सिनेमा को नई पहचान देने वाली हस्तियों को सम्मानित करने के लिए राजधानी देहरादून में दो दिवसीय भव्य फिल्म फेस्टिवल का आयोजन किया जाएगा। 27 और 28 जून को होने वाले इस आयोजन में प्रदेश और देश-विदेश से जुड़े फिल्मकारों, कलाकारों और सांस्कृतिक क्षेत्र की 100 प्रमुख विभूतियों को सम्मानित किया जाएगा।
उत्तराखंड फिल्म, टेलीविजन और रेडियो संगठन (उफतारा) की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य पिछले चार दशकों में उत्तराखंडी फिल्मों और संस्कृति के संरक्षण तथा प्रचार-प्रसार में योगदान देने वाले लोगों को एक मंच पर सम्मानित करना है। आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन उत्तराखंड की फिल्मी और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास होगा।
फेस्टिवल के दौरान उत्तराखंडी सिनेमा की 40 वर्षों की यात्रा को एक विशेष डॉक्यूमेंट्री के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा क्षेत्रीय फिल्मों की वर्तमान स्थिति, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर विशेषज्ञों, फिल्म निर्माताओं और कलाकारों के बीच चर्चा भी होगी।
आयोजन में उत्तराखंड की समृद्ध लोक संस्कृति, लोक गायन और पारंपरिक कलाओं की झलक भी देखने को मिलेगी। विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को मंच पर जीवंत किया जाएगा।
इस अवसर पर फिल्म उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने राज्य में फिल्म क्षेत्र के विकास को लेकर चिंता भी जताई। उनका कहना है कि नई फिल्म नीति बनने के बावजूद स्थानीय फिल्मकारों को अपेक्षित प्रतिनिधित्व और सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। प्रदेश में आधुनिक फिल्म स्टूडियो, पहाड़ी क्षेत्रों में सिनेमा हॉल और नियमित फिल्म पुरस्कार समारोहों की कमी को भी उद्योग की बड़ी चुनौतियों में गिना गया।
फिल्म जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि उत्तराखंड प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता के कारण फिल्म निर्माण के लिए एक आदर्श राज्य है। यदि सरकार और उद्योग मिलकर काम करें तो यह क्षेत्र रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा देने का एक बड़ा माध्यम बन सकता है।
दो दिवसीय यह फिल्म फेस्टिवल न केवल उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को सम्मान देने का मंच बनेगा, बल्कि प्रदेश के क्षेत्रीय सिनेमा को नई दिशा और पहचान देने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

