अनुशासन या अपमान? स्कूल में ऐसा क्या हुआ कि कैंची, ब्लेड और माफीनामे तक पहुंच गई बात!

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अल्मोड़ा। गुरु को समाज में ज्ञान, संस्कार और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है। लेकिन उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के सल्ट विकासखंड स्थित राजकीय इंटर कॉलेज बांगीधार से सामने आई एक घटना ने अनुशासन और अपमान की सीमा पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। आरोप है कि भूगोल विषय की प्रवक्ता आरजू अफरोज अंसारी ने अनुशासन के नाम पर पांच छात्रों के बाल कैंची से काट दिए, उनकी स्कूल यूनिफॉर्म ब्लेड से फाड़ दी और दो छात्राओं की नोटबुक के पन्ने भी फाड़ दिए। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश फैल गया और मामला प्रशासन तक पहुंच गया।

बताया जा रहा है कि बुधवार को कुछ छात्रों पर अनुशासनहीनता का आरोप लगाया गया। आरोप है कि इसके बाद शिक्षिका आरजू अफरोज अंसारी ने पांच छात्रों को कक्षा में बुलाया और कथित तौर पर कैंची से उनके बाल काट दिए। इतना ही नहीं, छात्रों की स्कूल ड्रेस पर ब्लेड चला दिया गया, जिससे उनकी यूनिफॉर्म फट गई। दो छात्राओं ने आरोप लगाया कि उनकी नोटबुक के पन्ने भी फाड़ दिए गए। यह पूरा घटनाक्रम छात्रों और अन्य बच्चों के सामने हुआ, जिससे वे मानसिक रूप से भी आहत हुए।

घटना की जानकारी जैसे ही अभिभावकों तक पहुंची, गुरुवार को बड़ी संख्या में लोग विद्यालय पहुंच गए। स्कूल प्रबंधन समिति, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और विश्व हिंदू परिषद के पदाधिकारियों ने विद्यालय परिसर में करीब दो घंटे तक विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि अनुशासन के नाम पर बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने दोषी के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की मांग की तथा सल्ट थानाध्यक्ष कश्मीर सिंह और विद्यालय के प्रधानाचार्य को ज्ञापन भी सौंपा।

मामले ने तूल पकड़ा तो आरोपों के घेरे में आईं शिक्षिका आरजू अफरोज अंसारी ने प्रधानाचार्य को लिखित माफीनामा सौंप दिया। इसके बाद उन्होंने आवश्यक कार्य का हवाला देते हुए अवकाश ले लिया। हालांकि, माफीनामे के बावजूद अभिभावकों का गुस्सा शांत नहीं हुआ। उनका कहना है कि यदि बच्चों के साथ ऐसा व्यवहार हुआ है तो केवल माफी से मामला खत्म नहीं होना चाहिए।

बढ़ते विवाद को देखते हुए शिक्षा विभाग और प्रशासन हरकत में आ गया। विद्यालय में बैठक बुलाकर पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। समिति को 26 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। जांच के दौरान छात्रों, अभिभावकों, प्रधानाचार्य, संबंधित शिक्षिका, अन्य शिक्षकों और विद्यालय स्टाफ समेत सभी पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे।

सल्ट की एसडीएम रिंकू बिष्ट ने बताया कि प्रशासन और शिक्षा विभाग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जांच समिति सभी तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर रिपोर्ट तैयार करेगी और उसी के आधार पर विभागीय तथा अन्य आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

वहीं सल्ट थानाध्यक्ष कश्मीर सिंह ने बताया कि समाचार लिखे जाने तक छात्रों के अभिभावकों की ओर से कोई एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। पुलिस का कहना है कि यदि शिकायत दर्ज होती है या जांच रिपोर्ट में कोई आपराधिक तथ्य सामने आते हैं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पूरे मामले की निगाह 26 जुलाई को आने वाली जांच रिपोर्ट पर टिकी है। यदि आरोप सही साबित होते हैं तो संबंधित शिक्षिका के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।