नैनीताल में राजा भैया परिवार को बड़ा झटका, बागवानी के लिए खरीदी गई जमीन का बड़ा हिस्सा सरकार के नाम

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उत्तर प्रदेश के कुंडा से विधायक और पूर्व मंत्री राजा भैया के परिवार से जुड़ी नैनीताल की जमीन पर जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला सुनाया है। कैंची धाम क्षेत्र के सिल्टोना गांव में बागवानी के उद्देश्य से खरीदी गई भूमि के मामले में डीएम कोर्ट ने 0.5206 हेक्टेयर भूमि राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने के आदेश दिए हैं। इस फैसले के बाद मामला उत्तराखंड से लेकर उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का विषय बन गया है।

जानकारी के अनुसार, करीब दो दशक पहले राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह ने सिल्टोना गांव में बागवानी प्रयोजन के लिए भूमि खरीदी थी। भूमि उपयोग को लेकर मामला जिला प्रशासन के संज्ञान में आने के बाद इसकी जांच कराई गई। सुनवाई के दौरान प्रशासन ने भूमि का निरीक्षण कराया और उद्यान विभाग से भी रिपोर्ट तलब की।

जांच में भूमि पर 27 नाशपाती के पेड़ पाए गए। इसके बाद उद्यान विभाग की रिपोर्ट और निर्धारित मानकों के आधार पर पेड़ों तथा उनके लिए आवश्यक पहुंच मार्ग को सुरक्षित रखते हुए 0.0344 हेक्टेयर भूमि भानवी सिंह के पक्ष में बरकरार रखने का निर्णय लिया गया। वहीं शेष 0.5206 हेक्टेयर भूमि को राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने के आदेश जारी किए गए।

प्रशासन का मानना है कि कृषि और बागवानी जैसे विशेष उद्देश्यों के लिए खरीदी गई भूमि का उपयोग उसी उद्देश्य के अनुरूप होना चाहिए। इसी आधार पर मामले की समीक्षा की गई और उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर फैसला सुनाया गया। डीएम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी जानकारी मांगी थी कि एक हेक्टेयर क्षेत्र में बागवानी के तहत सामान्य रूप से कितने फलदार पेड़ होने चाहिए।

राजा भैया उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक बड़ा और प्रभावशाली नाम रहे हैं। ऐसे में उनके परिवार से जुड़ी भूमि पर आया यह फैसला स्वाभाविक रूप से सुर्खियों में आ गया है। दिलचस्प बात यह भी है कि हाल के वर्षों में राजा भैया और उनकी पत्नी भानवी सिंह के बीच चल रहा कानूनी विवाद भी लगातार चर्चा में रहा है और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है।

उधर, जिला प्रशासन ने इसी सुनवाई के दौरान नैनीताल और रामनगर क्षेत्र के अन्य मामलों में भी भूमि उपयोग नियमों के उल्लंघन पर सख्त रुख अपनाया। कृषि और आवासीय प्रयोजनों के लिए आवंटित जमीनों पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित पाए जाने के मामलों में भी कई भूखंडों को सरकार के पक्ष में निहित करने के आदेश दिए गए हैं। प्रशासन का कहना है कि भूमि उपयोग नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।