बारुईपुर कांड: रोंगटे खड़े कर देगी 12 साल की बच्ची की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, दरिंदगी के बाद जिंदा ही तालाब में फेंका

Spread the love

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में एक ऐसी जघन्य वारदात सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। यहाँ एक 11-12 साल की मासूम बच्ची के साथ न केवल दरिंदगी की गई, बल्कि उसे जीवित ही बोरे में बंद कर तालाब में फेंक दिया गया। इस दिल दहला देने वाले हत्याकांड के बाद पूरे इलाके में भारी जन-आक्रोश फूट पड़ा है और राजनीतिक सरगर्मियां भी तेज हो गई हैं।

यह पूरी घटना शनिवार से शुरू हुई, जब मासूम बच्ची अपने घर से एक सहेली के लिए जन्मदिन का तोहफा (बर्थडे गिफ्ट) खरीदने बाजार के लिए निकली थी। जब वह काफी देर तक वापस नहीं लौटी, तो चिंतित परिजनों ने स्थानीय थाने में उसकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस और स्थानीय लोग बच्ची की तलाश में जुटे थे कि रविवार को सूर्यपुर हाट इलाके के एक तालाब में पानी के ऊपर एक संदिग्ध बोरा तैरता हुआ मिला। जब पुलिस ने उस बोरे को बाहर निकालकर खोला, तो उसके भीतर मासूम बच्ची का शव बरामद हुआ। शव मिलते ही पूरे इलाके में कोहराम मच गया और लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।

घटना के बाद सामने आई शुरुआती ऑटोप्सी (पोस्टमॉर्टम) रिपोर्ट ने इस हत्याकांड की क्रूरता को पूरी तरह उजागर कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक, बच्ची के साथ बर्बरतापूर्वक यौन उत्पीड़न (सेक्सुअल असॉल्ट) किया गया था। उसके प्राइवेट पार्ट्स पर गंभीर चोटों के अलावा शरीर के विभिन्न हिस्सों पर खरोंच और दांत से काटने के गहरे निशान पाए गए। यही नहीं, दरिंदों ने उसके सिर पर किसी भारी वस्तु से वार किया था या फिर उसे किसी सख्त सतह पर बेरहमी से पटका था, जिसके कारण अत्यधिक खून बह गया। सबसे चौंकाने वाला और रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा यह हुआ कि जब बच्ची को बोरे में बंद करके तालाब में फेंका गया, तब उसकी मौत नहीं हुई थी; वह जिंदा थी। डॉक्टरों को जांच के दौरान उसके फेफड़ों और पेट में पानी भरा हुआ मिला, जिससे यह साफ हो गया कि उसकी मौत पानी में डूबने और सिर की गंभीर चोट के कारण हुई।

इस अंधे कत्ल की गुत्थी को सुलझाने के लिए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए 6 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। पुलिस के लिए इस मामले में सबसे अहम सुराग इलाके में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज बनी। वीडियो खंगालने पर पुलिस को एक संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दिया, जो नीली टोपी पहने हुए था और बच्ची के लापता होने के वक्त उसके आसपास देखा गया था। सीसीटीवी से पहचान स्थापित होने के बाद, पुलिस ने आधुनिक विंग की मदद ली और आरोपी के मोबाइल की टावर लोकेशन को ट्रैक करना शुरू किया। आखिरकार, सटीक लोकेशन मिलते ही पुलिस ने बारुईपुर बाजार इलाके में एक बड़ा तलाशी अभियान चलाकर मुख्य आरोपी आनंद सरदार को सोमवार को दबोच लिया। आनंद सरदार की गिरफ्तारी के साथ ही इस मामले में पकड़े गए लोगों की कुल संख्या तीन हो गई है, जबकि तीन अन्य संदिग्धों को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की जा रही है।

मासूम की इस कदर बेरहमी से की गई हत्या की खबर फैलते ही स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। उग्र भीड़ ने इंसाफ की मांग को लेकर बारुईपुर-जयनगर रोड को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर टायर जलाए और वहां से गुजरने वाले पुलिस वाहनों में जमकर तोड़फोड़ की। इसी बीच, रविवार को शव मिलने के कुछ ही घंटों बाद जन-आक्रोश ने बेहद हिंसक रूप अख्तियार कर लिया। भीड़ ने घटना में संलिप्त होने के शक में एक स्थानीय व्यक्ति को पकड़ लिया और कानून को हाथ में लेते हुए उसकी पीट-पीटकर हत्या (मॉब लिंचिंग) कर दी। इस मॉब लिंचिंग के बाद क्षेत्र में तनाव और ज्यादा गहरा गया।

बिगड़ते हालात और कानून-व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कदम उठाए और दक्षिण 24 परगना के बारुईपुर, नरेंद्रपुर और सोनारपुर जैसे संवेदनशील इलाकों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 (निषेधाज्ञा) लागू कर दी। किसी भी अप्रिय घटना को रोकने और शांति व्यवस्था बहाल करने के लिए प्रभावित क्षेत्रों में भारी संख्या में पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स की तैनाती की गई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। इसके साथ ही पुलिस ने स्थानीय जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और जांच में प्रशासन का सहयोग करें। फिलहाल, एसआईटी सभी वैज्ञानिक और तकनीकी सबूतों को आपस में जोड़कर मामले की गहन तफ्तीश कर रही है ताकि अपराधियों को सख्त से सख्त सजा दिलाई जा सके।