नैनीताल/भवाली। विश्व प्रसिद्ध कैंची धाम के स्थापना दिवस पर सोमवार को श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा नीम करोली महाराज के दर्शन के लिए पहुंचे। दिनभर चले दर्शन कार्यक्रम के दौरान करीब 1 लाख 19 हजार 228 श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंचकर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया।
सुबह से ही मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। “बाबा नीम करोली महाराज की जय” के जयकारों और भक्ति गीतों से पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक वातावरण में डूबा नजर आया। श्रद्धालुओं का उत्साह इतना अधिक था कि बीच-बीच में हुई बारिश भी उनकी आस्था को डिगा नहीं सकी।
प्रशासन और पुलिस विभाग ने मेले को लेकर विशेष इंतजाम किए थे। यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए डायवर्जन प्लान, शटल सेवाएं और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। इसका परिणाम यह रहा कि पिछले वर्षों की तुलना में इस बार हल्द्वानी से भवाली और कैंची धाम मार्ग पर बड़े ट्रैफिक जाम की स्थिति नहीं बनी।
मंदिर परिसर और आसपास सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत रखा गया। सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन निगरानी और बड़ी संख्या में तैनात सुरक्षा कर्मियों की मदद से पूरे आयोजन पर नजर रखी गई। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल, विश्राम स्थल और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं भी उपलब्ध कराई गईं।
दर्शन के लिए पहुंचे कई श्रद्धालुओं ने व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद से कहीं कम समय में बाबा के दर्शन हो गए। श्रद्धालुओं के अनुसार, जहां घंटों इंतजार की संभावना थी, वहीं बेहतर प्रबंधन के कारण अपेक्षाकृत कम समय में दर्शन संभव हो सके।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी श्रद्धालुओं की सेवा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कई स्थानों पर भंडारों का आयोजन किया गया, जहां भक्तों को प्रसाद, भोजन और पेयजल वितरित किया गया।
कैंची धाम को बाबा नीम करोली महाराज की तपोभूमि माना जाता है। हर वर्ष स्थापना दिवस पर यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्तों का मानना है कि सच्ची श्रद्धा से बाबा के दरबार में आने वालों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन की कठिनाइयों का समाधान मिलता है।
इस वर्ष का स्थापना दिवस आयोजन शांतिपूर्ण, व्यवस्थित और भव्य रूप से संपन्न हुआ, जिसने एक बार फिर कैंची धाम की वैश्विक पहचान और बाबा नीम करोली महाराज के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को प्रदर्शित किया।

