उत्तराखंड में चिकित्सा सेवाएं देने के इच्छुक दूसरे राज्यों के डॉक्टरों के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया आसान हो गई है। अब उन्हें राज्य में पंजीकरण के लिए संबंधित राज्य की मेडिकल काउंसिल से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) हासिल करने की अनिवार्यता से राहत मिलेगी। उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल ने इस संबंध में परिपत्र जारी कर स्व-घोषणा के आधार पर पात्र चिकित्सकों के आवेदनों पर विचार करने की व्यवस्था स्पष्ट की है।
नई व्यवस्था के तहत मान्यता प्राप्त चिकित्सा योग्यता रखने वाले और देश के किसी राज्य की मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत चिकित्सक उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल में पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकेंगे। ऑनलाइन आवेदन में चिकित्सक की ओर से दी गई स्व-घोषणा के आधार पर आवेदन पर विचार किया जाएगा।
इस बदलाव से उन डॉक्टरों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो दूसरे राज्य में पंजीकृत होने के बाद उत्तराखंड में चिकित्सा सेवाएं देना चाहते हैं। एनओसी प्राप्त करने की प्रक्रिया में लगने वाले समय और अतिरिक्त औपचारिकताओं में कमी आने से पंजीकरण का रास्ता सुगम हो सकता है।
उत्तराखंड मेडिकल काउंसिल ने अपने परिपत्र में राज्य के मेडिकल काउंसिल अधिनियम, 2002 और नियमावली, 2004 के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया है कि दूसरे राज्य की मेडिकल काउंसिल में पंजीकृत चिकित्सकों के लिए एनओसी जमा करना अनिवार्य नहीं है।
हालांकि, एनओसी की अनिवार्यता खत्म होने का अर्थ पंजीकरण के अन्य मानकों से छूट मिलना नहीं है। चिकित्सकों को निर्धारित शैक्षिक योग्यता और पंजीकरण संबंधी पात्रता पूरी करनी होगी। नई व्यवस्था का उद्देश्य प्रक्रिया को सरल बनाना है, ताकि योग्य चिकित्सक अनावश्यक औपचारिकताओं में उलझे बिना राज्य में प्रैक्टिस के लिए पंजीकरण करा सकें।



