मंदिर बंद होने और नमाज से गरमाई सियासत, घंटानाद और महाआरती से बढ़ी हलचल
महाराष्ट्र। महाराष्ट्र के कल्याण स्थित ऐतिहासिक दुर्गाड़ी किला एक बार फिर बकरीद के मौके पर विवाद और सियासी टकराव का केंद्र बन गया। बकरीद की नमाज के दौरान दुर्गा माता मंदिर को कुछ समय के लिए बंद किए जाने के फैसले के विरोध में शिवसेना के दोनों गुटों के साथ भाजपा और कई हिंदू संगठन खुलकर मैदान में उतर आए। पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया और किले को सुरक्षा छावनी में तब्दील कर दिया गया।
सुबह से ही दुर्गाड़ी किले के बाहर माहौल तनावपूर्ण बना रहा। ठाकरे गुट और शिंदे गुट के कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग स्थानों पर प्रदर्शन करते हुए घंटानाद आंदोलन और महाआरती का आयोजन किया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में भगवा झंडे और घंटे दिखाई दिए। कार्यकर्ताओं का कहना था कि श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश और पूजा से रोकना धार्मिक भावनाओं के खिलाफ है।

30 मिनट मंदिर बंद रहने पर भड़का विरोध
बताया गया कि बकरीद की नमाज के दौरान सुरक्षा कारणों से मंदिर को लगभग आधे घंटे के लिए बंद रखा गया था। इसी फैसले को लेकर विरोध तेज हो गया। हिंदू संगठनों का आरोप है कि हर साल नमाज के दौरान मंदिर बंद कर दिया जाता है, जिससे श्रद्धालुओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
वहीं प्रशासन का कहना है कि यह कदम केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी संभावित विवाद को रोकने के लिए उठाया गया। पुलिस अधिकारियों ने लगातार लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की।

पहली बार भाजपा भी आंदोलन में खुलकर उतरी
इस बार विवाद इसलिए भी ज्यादा चर्चा में रहा क्योंकि पहली बार भाजपा ने भी खुलकर आंदोलन का समर्थन किया। भाजपा नेता और नगरसेवक महेश पाटिल ने चेतावनी दी थी कि यदि हिंदुओं को मंदिर में प्रवेश नहीं मिला तो हनुमान चालीसा और दुर्गा स्तोत्र का पाठ किया जाएगा। बाद में पुलिस ने उन्हें एहतियातन हिरासत में ले लिया।
महेश पाटिल की हिरासत के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी बढ़ गई। कई नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन दबाव में काम कर रहा है और हिंदू संगठनों की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।
https://www.facebook.com/share/v/18om7ZG5fk/

ठाकरे और शिंदे गुट ने किया प्रदर्शन
दुर्गाड़ी किले के पास लाल चौकी क्षेत्र में शिवसेना के ठाकरे गुट के नेताओं के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन किया गया। कार्यकर्ताओं ने महाआरती कर प्रशासन के फैसले का विरोध जताया। दूसरी ओर शिंदे गुट के समर्थक भी मंदिर में प्रवेश की मांग को लेकर सक्रिय दिखाई दिए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बकरीद के मौके पर उठा यह विवाद आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है। खासतौर पर शिवसेना और भाजपा के हिंदुत्व आधारित एजेंडे को लेकर नई राजनीतिक रणनीति की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

40 साल पुराना बताया जा रहा विवाद
स्थानीय नेताओं के अनुसार दुर्गाड़ी किले को लेकर यह विवाद नया नहीं है। कई दशक पहले शुरू हुआ घंटानाद आंदोलन अब एक परंपरा का रूप ले चुका है। हर साल बकरीद के दौरान मंदिर में पूजा और घंटा बजाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं।
प्रशासन ने पूरे इलाके में ड्रोन, सीसीटीवी और अतिरिक्त पुलिस बल की मदद से निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों का दावा है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी भी तरह की अप्रिय घटना नहीं होने दी जाएगी।

