नैनीताल। बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की ओर से चढ़ाए जाने वाले ‘थाली भेंट’ की गणना के दौरान कथित वित्तीय अनियमितता के मामले में आरोपित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को उच्च न्यायालय से राहत नहीं मिल सकी। न्यायालय ने उनकी ओर से दायर याचिका को निरस्त कर दिया। इसके बाद बदरी-केदार मंदिर समिति ने उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए सेवा से बर्खास्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। समिति इस संबंध में विधिक विशेषज्ञों से राय ले रही है।
उधर, मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम लगातार साक्ष्य जुटाने में लगी हुई है। जांच के दौरान बदरीनाथ धाम में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग को सुरक्षित किया जा रहा है। अब तक 32 दिनों की फुटेज को पुनर्प्राप्त करने का कार्य चल रहा है, जबकि 13 दिनों की रिकॉर्डिंग पहले ही जांच टीम के कब्जे में है। अधिकारियों का मानना है कि विस्तृत फुटेज से पूरे घटनाक्रम की कड़ियां स्पष्ट हो सकती हैं और यदि अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है तो जांच का दायरा भी बढ़ सकता है।
आरोपित की ओर से न्यायालय में निलंबन आदेश, प्राथमिकी और गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने न्यायालय को बताया कि आरोपित की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी है। इस पर न्यायालय ने कहा कि गिरफ्तारी हो जाने के बाद गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग स्वतः अप्रासंगिक हो जाती है। इसी आधार पर याचिका को निरस्त कर दिया गया।
यह पूरा मामला जुलाई के प्रारंभ में उस समय सामने आया था, जब सामाजिक माध्यमों पर प्रसारित एक वीडियो में बदरीनाथ मंदिर में चढ़ावे की गणना के दौरान कथित गड़बड़ी दिखाई देने का दावा किया गया। वीडियो सामने आने के बाद बदरी-केदार मंदिर समिति ने तत्काल संज्ञान लेते हुए विभागीय जांच समिति गठित की थी।
प्रारंभिक जांच में समिति को ऐसे संकेत मिले कि गणना के दौरान निर्धारित स्थान से धनराशि उठाई गई थी। इसके बाद संबंधित कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। मंदिर समिति के प्रभारी अधिकारी की शिकायत पर बदरीनाथ थाने में मुकदमा दर्ज किया गया और बाद में पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।
अब न्यायालय से राहत नहीं मिलने के बाद विभागीय कार्रवाई और आपराधिक जांच दोनों समानांतर रूप से आगे बढ़ रही हैं। विशेष जांच टीम सीसीटीवी फुटेज, दस्तावेजी साक्ष्यों और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ के आधार पर पूरे घटनाक्रम की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। यदि जांच में अन्य कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके विरुद्ध भी विधिक कार्रवाई की जा सकती है।


