राजस्थान के उदयपुर में जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय में बुधवार को सामने आया एक घटनाक्रम सरकारी कार्यालयों में आम नागरिकों, खासकर बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए उपलब्ध सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर गया। जमीन विवाद से जुड़ी शिकायत लेकर एक बुजुर्ग महिला एसपी कार्यालय पहुंचीं, लेकिन कार्यालय पहली मंजिल पर होने और वहां तक पहुंचने के लिए केवल सीढ़ियों का सहारा होने के कारण उन्हें काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला उम्र के कारण ठीक से चल भी नहीं पा रही थीं। झुकी कमर और कमजोर शरीर के बावजूद वह हाथों का सहारा लेकर धीरे-धीरे सीढ़ियां चढ़ती रहीं। परिसर में सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी मौजूद थे, लेकिन किसी ने उन्हें सहारा देने या यह सुझाव देने की पहल नहीं की कि उनकी शिकायत नीचे ही सुन ली जाएगी। काफी मशक्कत के बाद वह पहली मंजिल तक तो पहुंचीं, लेकिन बताया जाता है कि उनकी पुलिस अधीक्षक से मुलाकात नहीं हो सकी और उन्हें बिना शिकायत दर्ज कराए वापस लौटना पड़ा।
इस घटना के बाद सरकारी दफ्तरों की व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं। जिला कलेक्ट्रेट परिसर में एसपी सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के कार्यालय पहली मंजिल पर स्थित हैं, लेकिन बुजुर्गों, दिव्यांगों और गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए वहां तक पहुंचने की कोई सुगम व्यवस्था नहीं है। न रैंप, न लिफ्ट और न ही ऐसी कोई व्यवस्था, जिससे जरूरतमंद लोगों को राहत मिल सके।
प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े जानकारों का मानना है कि ऐसे कार्यालयों में वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए अलग सहायता व्यवस्था, व्हीलचेयर, रैंप या अधिकारियों द्वारा भूतल पर शिकायत सुनने जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए, ताकि किसी भी व्यक्ति को अपनी फरियाद लेकर इस तरह संघर्ष न करना पड़े।
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इस मामले में पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन ने कहा कि उन्हें इस विशेष घटना की जानकारी नहीं है और संबंधित महिला से उनकी मुलाकात भी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि कार्यालय में आने वाले बुजुर्ग और जरूरतमंद फरियादियों का विशेष ध्यान रखा जाता है। यदि कोई व्यक्ति सीढ़ियां चढ़ने में असमर्थ है तो उसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
यह घटना केवल एक बुजुर्ग महिला की परेशानी भर नहीं है, बल्कि यह सरकारी व्यवस्था के उस पहलू को भी उजागर करती है, जहां शिकायत लेकर आने वाले जरूरतमंद नागरिकों को सबसे पहले बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझना पड़ता है। ऐसे में सवाल यही है कि क्या सरकारी कार्यालयों तक पहुंच आसान बनाना भी प्रशासन की प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए?


