कैलास यात्रा पर बारिश का ब्रेक: भूस्खलन से थमा आस्था का रास्ता, 200 से अधिक यात्री पहाड़ों में फंसे

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पिथौरागढ़। उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने कैलास मानसरोवर यात्रा की रफ्तार पर पूरी तरह विराम लगा दिया है। भूस्खलन और पहाड़ों से लगातार गिर रहे मलबे के कारण ऐतिहासिक तवाघाट-गुंजी मार्ग लगातार दूसरे दिन भी बंद रहा। इसके चलते 200 से अधिक यात्री अलग-अलग पड़ावों पर फंस गए हैं और यात्रा का पूरा कार्यक्रम प्रभावित हो गया है।

प्रशासन के अनुसार मार्ग कई स्थानों पर गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गया है। सुरक्षा को देखते हुए आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा रही है। कैलास यात्रा पर जा रहा चौथा दल फिलहाल धारचूला में ही रोक दिया गया है। सड़क खुलने और स्थिति सामान्य होने के बाद ही दल को आगे रवाना किया जाएगा। दूसरी ओर, यात्रा पूरी कर लौट रहा पहला दल भी गुंजी में ही रुका हुआ है, क्योंकि वापसी का रास्ता भी बंद है।

बारिश का असर केवल कैलास यात्रा तक सीमित नहीं है। जिले में जनजीवन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। आपदा नियंत्रण कक्ष के अनुसार धारचूला में सबसे अधिक 92.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि पिथौरागढ़ मुख्यालय में 58 मिलीमीटर और डीडीहाट में 53 मिलीमीटर बारिश हुई। लगातार हो रही वर्षा से पहाड़ दरक रहे हैं और नए-नए स्थानों पर मलबा आने का सिलसिला जारी है।

स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तवाघाट-गुंजी मार्ग के अलावा थल-मुनस्यारी मुख्य सड़क और जिले की 17 आंतरिक ग्रामीण सड़कें भी बंद पड़ी हैं। सड़क संपर्क टूटने से कई गांवों का आवागमन प्रभावित हुआ है, जबकि राहत और मरम्मत कार्य मौसम साफ होने पर निर्भर हैं।

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प्रशासन और सीमा सड़क संगठन की टीमें मार्ग खोलने के प्रयास में जुटी हैं, लेकिन लगातार बारिश राहत कार्यों में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है। ऐसे में फिलहाल यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर ही ठहराया गया है और मौसम में सुधार का इंतजार किया जा रहा है। पहाड़ों में सक्रिय मानसून ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यहां प्रकृति के सामने हर योजना को मौसम के अनुकूल ही चलना पड़ता है।