हैदराबाद के मियापुर इलाके में हुई एक दर्दनाक घटना ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है। 37 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर ईशा साहू ने अपनी छह महीने की बेटी को गोद में लेकर अपार्टमेंट की छठी मंजिल से छलांग लगा दी। इस हादसे में जहां मां की मौत हो गई, वहीं एक चमत्कारिक संयोग में बच्ची की जान बच गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नीचे गिरते समय बच्ची मां की गोद से छिटककर अलग जा गिरी, जिससे उसे गंभीर चोट नहीं पहुंची। उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत को खतरे से बाहर बताया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि महिला लंबे समय से अनिद्रा (इंसोमनिया) की समस्या से जूझ रही थी। लगातार नींद पूरी न होने और मानसिक तनाव के कारण वह गहरे अवसाद में चली गई थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है और परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ की जा रही है।
यह घटना केवल एक आत्मघाती कदम की कहानी नहीं है, बल्कि आधुनिक जीवनशैली, बढ़ते मानसिक दबाव और प्रसव के बाद महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज की जागरूकता पर भी सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चे के जन्म के बाद कई महिलाओं को शारीरिक और मानसिक बदलावों का सामना करना पड़ता है। यदि समय रहते उनकी समस्याओं को समझा और उपचार उपलब्ध कराया जाए तो ऐसे हादसों को रोका जा सकता है।
तेज रफ्तार जिंदगी में अक्सर मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं नजरअंदाज हो जाती हैं। लेकिन हैदराबाद की यह घटना याद दिलाती है कि मानसिक तनाव भी उतना ही गंभीर है जितनी कोई शारीरिक बीमारी। जरूरत इस बात की है कि परिवार, मित्र और समाज ऐसे संकेतों को समय रहते पहचानें और जरूरतमंद व्यक्ति को सहयोग तथा उपचार उपलब्ध कराएं।
एक मासूम बच्ची की बची हुई जिंदगी और उसकी मां की असमय मौत अब मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील होने का संदेश दे रही है।

