महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित पनवेल तहसील के नांदगांव में एक नन्हीं, मासूम बच्ची, जिसकी उम्र मुश्किल से दो साल रही होगी, आंगनवाड़ी जाने के नाम पर थोड़ा हिचकिचा रही थी और रो रही थी। बच्चों का इस तरह स्कूल जाने से कतराना या रोना बेहद आम बात है, लेकिन वहां खड़ी उसकी सगी मां का धैर्य जवाब दे चुका था। गुस्से और झुंझलाहट में अंधी हो चुकी उस मां ने ममता की सारी हदें पार कर दीं। उसने आव देखा न ताव और अपनी ही नन्ही बेटी के सीने पर सीधे लात दे मारी। लात इतनी जोरदार थी कि मासूम बच्ची का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया और वह आंगनवाड़ी के प्रवेश द्वार की पक्की सीढ़ियों पर पीठ के बल सीधे जा गिरी।
अचानक हुए इस हमले और दर्द से सहमी वह बच्ची वहीं फर्श पर तड़पकर फूट-फूटकर रोने लगी। इस दिल दहला देने वाली घटना के वक्त वहां आंगनवाड़ी की असली महिला कर्मचारी भी मौजूद थी। जैसे ही मां ने बच्ची पर यह अमानवीय प्रहार किया, उस कर्मचारी ने तुरंत आगे बढ़कर मां को पीछे धकेला और जमीन पर रोती हुई बच्ची को सुरक्षा देते हुए अपनी गोद में उठा लिया।
इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। शुरुआत में इंटरनेट पर लोगों ने बिना सच जाने यह अफवाह उड़ा दी कि लात मारने वाली महिला कोई आंगनवाड़ी कार्यकर्ता है, जिससे पूरे इलाके में प्रशासन के खिलाफ गुस्सा पनपने लगा। लेकिन जब यह वीडियो पनवेल सिटी पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने आया, तो उन्होंने तुरंत हरकत में आते हुए मामले की जांच शुरू की। पुलिस की त्वरित कार्रवाई में यह चौंकाने वाला और दुखद सच सामने आया कि बच्ची पर जुल्म ढाने वाली कोई बाहरी महिला नहीं, बल्कि उसकी अपनी सगी मां ही थी।
पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपी महिला को हिरासत में ले लिया और पूछताछ शुरू की। पुलिस की सख्ती के आगे महिला ने अपना गुनाह कबूल कर लिया और बताया कि उसने गुस्से में आकर यह खौफनाक कदम उठाया था। गनीमत यह रही कि इस हादसे में बच्ची को कोई गंभीर अंदरूनी चोट नहीं आई। फिलहाल पुलिस ने इस पूरे संवेदनशील मामले की रिपोर्ट राज्य बाल कल्याण समिति को सौंप दी है, ताकि बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस मां के खिलाफ आगे की उचित कानूनी कार्रवाई की जा सके।


