मायके से हिमालय तक मां नंदा की विदाई: 5 सितंबर से शुरू होगी उत्तराखंड की सबसे बड़ी लोक आस्था यात्रा

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उत्तराखंड की आस्था, संस्कृति और लोक परंपराओं का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन मां नंदा देवी बड़ी जात यात्रा इस वर्ष 5 से 30 सितंबर तक निकाली जाएगी। यात्रा की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और परंपरा के अनुसार विभिन्न धार्मिक स्थलों व गांवों में लोगों को यात्रा का निमंत्रण दिया जा रहा है।

लोकमान्यताओं के अनुसार मां नंदा को उत्तराखंड की बेटी माना जाता है। बड़ी जात यात्रा उस भावनात्मक परंपरा का प्रतीक है, जिसमें मां नंदा को उनके मायके से विदा कर हिमालय स्थित कैलाश क्षेत्र में भगवान शिव के धाम, अर्थात उनके ससुराल, तक सम्मानपूर्वक पहुंचाया जाता है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि बेटी की विदाई, मातृशक्ति के सम्मान और प्रकृति के प्रति श्रद्धा का अद्भुत प्रतीक भी है।

इसी लोक परंपरा को निभाते हुए यात्रा से पहले विभिन्न क्षेत्रों में निमंत्रण देने की परंपरा निभाई जाती है। इसी क्रम में यात्रा समिति के प्रतिनिधियों ने भगवान बदरी विशाल के दर्शन कर यात्रा के सफल आयोजन की कामना की और सीमांत क्षेत्रों सहित अनेक श्रद्धालुओं को इस ऐतिहासिक यात्रा में शामिल होने का आमंत्रण दिया।

करीब एक माह तक चलने वाली इस कठिन हिमालयी यात्रा में उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। पारंपरिक डोलियों, छंतोलियों, लोकगीतों, ढोल-दमाऊं की गूंज और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच निकलने वाली यह यात्रा उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने का सबसे बड़ा माध्यम मानी जाती है।

नंदा देवी बड़ी जात केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति, सामाजिक एकता और सदियों पुरानी परंपराओं का जीवंत उत्सव है।