अल्मोड़ा। मुख्यमंत्री राहत कोष के नाम पर स्कूली बच्चों से धनराशि वसूले जाने का मामला सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि हरियाणा निवासी महेश शर्मा नाम का एक कथित जादूगर मुख्य शिक्षा अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के अनुमति पत्र का दुरुपयोग कर फर्जी दस्तावेज तैयार कर विद्यालयों में पहुंचा और प्रत्येक छात्र से 10 रुपये लेने की बात कहकर कार्यक्रम आयोजित करने लगा।
जानकारी के अनुसार, मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने 16 मई को महेश शर्मा को जिले के सरकारी, अशासकीय, निजी, सीबीएसई और आईसीएसई से संबद्ध विद्यालयों में वैज्ञानिक मैजिक शो एवं सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति दी थी। इस अनुमति के साथ स्पष्ट शर्त भी रखी गई थी कि सभी कार्यक्रम पूरी तरह निःशुल्क होंगे और किसी भी विद्यार्थी से किसी प्रकार का शुल्क या अंशदान नहीं लिया जाएगा।
अनुमति के तहत जल संरक्षण, नशा मुक्ति, पर्यावरण संरक्षण, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, स्वच्छता और अंधविश्वास उन्मूलन जैसे सामाजिक विषयों पर जागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन आरोप है कि बाद में इसी अनुमति पत्र का सहारा लेकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से एक फर्जी पत्र तैयार किया गया।
इस कथित फर्जी पत्र में दावा किया गया कि प्रत्येक छात्र से 10 रुपये अंशदान लिया जाएगा और एकत्र की गई धनराशि का 30 प्रतिशत मुख्यमंत्री राहत कोष में जमा कराया जाएगा। इसी आधार पर कई विद्यालयों में बच्चों से धनराशि वसूले जाने की शिकायतें शिक्षा विभाग तक पहुंचीं।
शिकायतों की जांच के बाद शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि शुल्क वसूली संबंधी पत्र पूरी तरह फर्जी है और विभाग की ओर से ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया गया। अधिकारियों का कहना है कि पहले भी इस संबंध में शिकायतें मिली थीं, जिसके बाद अब संबंधित कथित जादूगर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है।
मुख्य शिक्षा अधिकारी चंदन सिंह बिष्ट ने कहा कि विभाग ने केवल निःशुल्क जागरूकता कार्यक्रमों की अनुमति दी थी। यदि मुख्यमंत्री राहत कोष का नाम लेकर किसी विद्यालय या छात्र से धनराशि वसूली गई है तो यह गंभीर मामला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फर्जी पत्र तैयार कर लोगों को गुमराह करने वालों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



