देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हलचल तेज होने लगी है। लंबे अंतराल के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 4 और 5 जून को उत्तराखंड दौरे पर आ रहे हैं। कांग्रेस इसे केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए अभियान की औपचारिक शुरुआत के रूप में देख रही है।
कार्यक्रम के अनुसार राहुल गांधी 4 जून को अल्मोड़ा में विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे और पौड़ी में पूर्व सैनिक सम्मेलन में भाग लेंगे। इसके बाद 5 जून को देहरादून में पार्टी पदाधिकारियों, विधायकों, पूर्व विधायकों और संगठन के विभिन्न प्रकोष्ठों के साथ बैठक कर चुनावी रणनीति पर मंथन करेंगे।
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो भाजपा पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री Rajnath Singh के दौरों के जरिए चुनावी माहौल बनाने में जुट चुकी है। ऐसे में राहुल गांधी का दौरा कांग्रेस की ओर से सीधा राजनीतिक जवाब माना जा रहा है।
कांग्रेस का दावा है कि बेरोजगारी, महंगाई, पलायन, श्रमिक समस्याएं और अग्निवीर योजना जैसे मुद्दों को लेकर जनता में असंतोष है। पार्टी इन्हीं विषयों को चुनावी विमर्श का केंद्र बनाकर भाजपा सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं कांग्रेस नेतृत्व को उम्मीद है कि राहुल गांधी की मौजूदगी संगठन में नई ऊर्जा भरने के साथ-साथ लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी को भी कम करेगी।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने दौरे की पुष्टि करते हुए कहा कि कार्यक्रमों की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और जल्द ही नेताओं को जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। दूसरी ओर पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का मानना है कि राज्य में बदलाव की चाह बढ़ रही है और कांग्रेस के लिए यह बड़ा राजनीतिक अवसर है।
कुल मिलाकर राहुल गांधी का यह दौरा केवल जनसभा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उत्तराखंड में कांग्रेस की चुनावी दिशा, संगठनात्मक एकजुटता और 2027 की सत्ता की लड़ाई का रोडमैप तय करने वाला महत्वपूर्ण राजनीतिक पड़ाव साबित हो सकता है।

