बागेश्वर के एक छोटे से गांव में उस दिन घर के आंगन में खुशियां उतर आई थीं। पांच बेटियों के बाद परिवार में बेटे ने जन्म लिया था। लंबे इंतजार के बाद घर में बेटे की किलकारी गूंजी तो परिवार के चेहरों पर मुस्कान थी। दादा की बरसों पुरानी चाहत पूरी हुई थी और पिता भी अपने बेटे को देखने की खुशी में थे।
लेकिन किसी को नहीं पता था कि यह खुशी इतनी छोटी होगी।
बेटे को जन्म देने के कुछ ही देर बाद 26 वर्षीय भावना की मौत हो गई। जिस घर में कुछ समय पहले तक नवजात की किलकारी सुनाई दे रही थी, वहां अचानक मातम पसर गया। एक नवजात बेटा अपनी मां की गोद से महरूम हो गया और उसकी पांच बहनों के सिर से भी मां का साया हमेशा के लिए उठ गया।
सेलाबगड़ गांव की रहने वाली भावना का यह छठा प्रसव था। पति मुकेश रावल मेहनत-मजदूरी कर परिवार चलाते हैं और इन दिनों कैंची धाम के एक होटल में काम कर रहे थे। प्रसव का समय नजदीक आने पर वह घर लौटे थे। उन्हें उम्मीद थी कि घर में नए सदस्य के आने से खुशियां बढ़ेंगी, लेकिन पत्नी की मौत ने परिवार की पूरी तस्वीर बदल दी।
भावना की मौत के बाद पांचों बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल है। घर के बुजुर्गों के लिए भी यह सदमा किसी पहाड़ से कम नहीं है। जिस पोते के जन्म का इंतजार था, उसके आने की खुशी मां की मौत के गम में दब गई।
भावना की मौत के बाद बैजनाथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। मृतका के रिश्तेदार और ग्राम प्रधान चंदन सिंह ने चिकित्सकों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अगर भावना की गंभीर स्थिति को देखते हुए समय रहते उसे उच्च केंद्र रेफर किया जाता, तो शायद उसकी जान बच सकती थी।
बताया गया है कि प्रसव से पहले भावना की जांच हुई थी और अंतिम रिपोर्ट में उसका हीमोग्लोबिन कम पाया गया था। चिकित्सकों ने उसे हाई रिस्क प्रसूता की जानकारी देते हुए उपचार की सलाह भी दी थी।



