केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद पंजाब की राजनीति में पेपर लीक का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर आम आदमी पार्टी सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है और राज्य के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।
विपक्ष का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं ने युवाओं के भविष्य पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल इस मुद्दे को लेकर सरकार को लगातार घेर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि अन्य राज्यों में नैतिक जिम्मेदारी तय की जाती है तो पंजाब में भी वही मानक लागू होने चाहिए।
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी का कहना है कि यह पारंपरिक अर्थों में पेपर लीक का मामला नहीं, बल्कि परीक्षा के दौरान हाई-टेक नकल की कोशिश थी, जिसे समय रहते पकड़ लिया गया। सरकार का दावा है कि आरोपियों की गिरफ्तारी कर सख्त कार्रवाई की गई है और पूरी प्रक्रिया की जांच जारी है।
हाल ही में हुई फार्मेसी अधिकारी भर्ती परीक्षा में कथित तौर पर पेन कैमरा, ब्लूटूथ उपकरण और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों के जरिए नकल करने का प्रयास सामने आने के बाद यह विवाद और गहरा गया। पुलिस की कार्रवाई के बाद कई लोगों की गिरफ्तारी भी हुई है।
पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण यह मुद्दा अब पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। विपक्ष इसे युवाओं के भविष्य और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता से जोड़कर सरकार पर हमला बोल रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल अपनी कार्रवाई का हवाला देते हुए विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक अवसरवाद बता रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में पेपर लीक का यह विवाद पंजाब की चुनावी राजनीति का बड़ा मुद्दा बन सकता है।



