रूसी तेल के जहाज पर ब्रिटेन का बड़ा एक्शन, उत्तराखंड का कप्तान जेल में, परिवार ने भारत सरकार से लगाई गुहार

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रामनगर। उत्तराखंड के नैनीताल जिले के रामनगर निवासी मर्चेंट नेवी कप्तान अजय पंत इन दिनों ब्रिटेन में कानूनी संकट का सामना कर रहे हैं। रूस से कच्चा तेल लेकर भारत लौट रहे एक टैंकर जहाज के संचालन के दौरान ब्रिटिश एजेंसियों ने उन्हें हिरासत में ले लिया। आरोप है कि जहाज प्रतिबंधित रूसी तेल की ढुलाई में शामिल था और बिना वैध राष्ट्रीय झंडे के ब्रिटिश समुद्री क्षेत्र में प्रवेश कर गया था।

जानकारी के अनुसार, जहाज रूस के उस्त-लूगा बंदरगाह से भारी मात्रा में कच्चा तेल लेकर गुजरात के सिक्का पोर्ट की ओर रवाना हुआ था। यात्रा के दौरान ब्रिटिश अधिकारियों ने समुद्र में विशेष अभियान चलाकर जहाज को अपने नियंत्रण में ले लिया। बताया जा रहा है कि रात के समय कमांडो दस्ते ने हेलिकॉप्टर के जरिए जहाज पर उतरकर कार्रवाई की और कप्तान अजय पंत को हिरासत में ले लिया।

ब्रिटेन की जांच एजेंसियों का दावा है कि जहाज उन प्रतिबंधों के दायरे में आता है जो रूस से तेल व्यापार को नियंत्रित करने के लिए लगाए गए हैं। मामले में कप्तान पर संबंधित नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है। पहली सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जबकि अगली सुनवाई जुलाई में निर्धारित की गई है।

उधर, अजय पंत के परिवार का कहना है कि वे केवल जहाज के कप्तान के रूप में अपनी पेशेवर जिम्मेदारियां निभा रहे थे और कंपनी के निर्देशों का पालन कर रहे थे। परिवार का दावा है कि उनका वर्षों का समुद्री करियर बेदाग रहा है और उन्हें इस पूरे मामले में बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

कप्तान की पत्नी रितु पंत ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रधानमंत्री और विदेश मंत्रालय से हस्तक्षेप की अपील की है। उनका कहना है कि गिरफ्तारी की आधिकारिक सूचना भी परिवार को समय पर नहीं मिली। उन्होंने भारत सरकार से न्यायिक और राजनयिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

इस बीच उत्तराखंड सरकार भी सक्रिय हो गई है। राज्य सरकार ने विदेश मंत्रालय से संपर्क कर मामले में सहायता मांगी है। अधिकारियों का कहना है कि ब्रिटेन स्थित भारतीय मिशन परिवार के संपर्क में है और आवश्यक कानूनी मदद उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी है।

फिलहाल जहाज ब्रिटेन के तटीय क्षेत्र में रोका गया है, जबकि उस पर मौजूद अन्य भारतीय और विदेशी क्रू सदस्यों की स्थिति पर भी नजर रखी जा रही है। अब सबकी निगाहें अगली अदालत सुनवाई और भारत सरकार के संभावित हस्तक्षेप पर टिकी हैं।