देहरादून सचिवालय में गुरुवार का दिन सामान्य नहीं था। सुबह कैबिनेट बैठक शुरू होने से पहले माहौल भावुक हो गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों ने पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी और अंतरराष्ट्रीय निशानेबाज जसपाल राणा को श्रद्धांजलि अर्पित की। दो मिनट के मौन के बाद शुरू हुई बैठक में ऐसे फैसले लिए गए, जिनका असर शिक्षा, रोजगार, पर्यटन, कृषि और चारधाम यात्रा से जुड़े हजारों लोगों पर पड़ने वाला है।
सबसे बड़ी घोषणा उस समय सामने आई जब सरकार ने उत्तराखंड को पूर्ण साक्षर राज्य घोषित करने का फैसला किया। वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में चलाए जा रहे अभियानों और प्रयासों के बाद प्रदेश की साक्षरता दर 98 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गई है। पहाड़ से लेकर मैदान तक शिक्षा के प्रसार को राज्य की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
कैबिनेट की दूसरी बड़ी राहत उपनल कर्मचारियों के लिए आई। लंबे समय से समान कार्य-समान वेतन के लाभ को लेकर चल रही मांग पर सरकार ने कटऑफ तिथि को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। इससे बड़ी संख्या में कर्मचारियों को लाभ मिलने का रास्ता खुल गया है। कर्मचारी संगठनों के लिए यह फैसला लंबे इंतजार के बाद मिली राहत के रूप में देखा जा रहा है।
शिक्षा क्षेत्र में भी कई बदलावों की नींव रखी गई। संस्कृत विद्यालयों की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से नई संशोधित नियमावली को मंजूरी दी गई। इससे विद्यालयों की मान्यता, पाठ्यक्रम और परीक्षा प्रणाली में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
वहीं, राज्य आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के लिए भी सरकार ने संवेदनशील रुख दिखाया। भर्ती प्रक्रियाओं में प्रमाणपत्रों के विलंब के कारण जिन अभ्यर्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ा था, उन्हें दस्तावेज सत्यापन के दौरान विशेष अवसर देने का निर्णय लिया गया है। इससे कई युवाओं की उम्मीदें फिर से जाग उठी हैं।
चारधाम यात्रा से जुड़े हजारों परिवारों को प्रभावित करने वाला एक अहम फैसला भी बैठक में लिया गया। यात्रा के दौरान सेवा देने वाले घोड़ा-खच्चरों के लिए बीमा सहायता देने का निर्णय किया गया है। दुर्घटना या किसी अनहोनी की स्थिति में अब पशुपालकों और संचालकों को आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी। पहाड़ी क्षेत्रों में आजीविका का महत्वपूर्ण साधन माने जाने वाले इस व्यवसाय के लिए इसे राहत भरा कदम माना जा रहा है।
पर्यटन क्षेत्र को नई पहचान देने के लिए अंतरराष्ट्रीय हिमालयन कार रैली के आयोजन को भी मंजूरी मिली। दुनिया के विभिन्न देशों से आने वाली गाड़ियों की गूंज जल्द ही उत्तराखंड की वादियों में सुनाई दे सकती है। सरकार को उम्मीद है कि इससे साहसिक पर्यटन को नया आयाम मिलेगा और राज्य वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत होगा।
कृषि और उद्यानिकी क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण पहल की गई है। सेलाकुई स्थित सगंध एवं हर्बल केंद्र में मिलावट जांच सुविधा विकसित की जाएगी। इसके लिए नए पद भी सृजित किए गए हैं। सरकार का मानना है कि इससे हर्बल उत्पादों की गुणवत्ता बढ़ेगी और निर्यात को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
पशुपालन क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के उपयोग की दिशा में कदम बढ़ाते हुए एम्ब्रियो ट्रांसफर तकनीक पर आधारित पायलट परियोजना को मंजूरी दी गई है। इसका उद्देश्य बेहतर नस्ल के गौवंश विकसित करना और दुग्ध उत्पादन बढ़ाना है। यदि यह योजना सफल होती है तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिल सकती है।
लोक निर्माण विभाग के स्तर पर बढ़ती बिटुमेन कीमतों के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। वैश्विक परिस्थितियों और अंतरराष्ट्रीय तनावों के कारण निर्माण कार्यों की लागत बढ़ने की चुनौती सामने है। सरकार ने इसके प्रभाव को कम करने के लिए आवश्यक प्रबंधन व्यवस्था तैयार करने का निर्णय लिया है।
गृह विभाग से जुड़े प्रस्तावों में जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए नियमावलियों में संशोधन को मंजूरी दी गई। इसके अलावा आबकारी विभाग में भी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
कुल मिलाकर देहरादून में हुई यह कैबिनेट बैठक केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं रही, बल्कि शिक्षा, रोजगार, पर्यटन, कृषि, पशुपालन और सामाजिक कल्याण जैसे कई क्षेत्रों के लिए नई दिशा तय करने वाली साबित हुई। अब निगाहें इस बात पर होंगी कि इन फैसलों का लाभ जमीन पर लोगों तक कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से पहुंचता है।

