नैनीताल की खाई में समाई टेंपो ट्रैवलर, मेरठ नवासी दो महिलाओं की मौत, 27 घायल

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नैनीताल की वादियों से खुशियां समेटकर लौट रहा एक परिवार कुछ ही पलों में मातम में बदल गया। बुधवार शाम नैनीताल-कालाढूंगी मार्ग पर लाल मिट्टी के पास पर्यटकों से भरी एक टेंपो ट्रैवलर अचानक अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। हादसा इतना भीषण था कि वाहन में सवार लोगों की चीख-पुकार दूर तक सुनाई देने लगी। दुर्घटना में दो महिलाओं की मौत हो गई, जबकि चालक समेत 27 लोग घायल हो गए।

मेरठ के इस्लामाबाद ताला फैक्ट्री क्षेत्र निवासी पुस्तक विक्रेता नसीम अहमद अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ नैनीताल घूमने आए थे। सुबह सभी लोग उत्साह के साथ पर्यटन स्थलों का भ्रमण कर रहे थे। शाम करीब सात बजे वे टेंपो ट्रैवलर से वापस मेरठ लौट रहे थे। बताया जा रहा है कि कालाढूंगी पहुंचने से करीब एक किलोमीटर पहले लाल मिट्टी क्षेत्र में वाहन के ब्रेक अचानक जवाब दे गए। चालक शहजाद ने वाहन को नियंत्रित करने की भरसक कोशिश की, लेकिन तेज ढलान पर रफ्तार बढ़ने के कारण टेंपो ट्रैवलर सड़क से नीचे खाई में जा गिरा।

हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। वाहन में महिलाएं और बच्चे भी सवार थे। खाई से मदद की पुकार सुनकर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। जब तक बचाव दल पहुंचा, तब तक अंधेरा घिर चुका था। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र और कम रोशनी के कारण राहत कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया।

पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर रेस्क्यू अभियान शुरू किया। टॉर्च और अन्य प्रकाश उपकरणों की मदद से बचावकर्मी खाई में उतरे। कई घायलों को स्ट्रेचर के सहारे खाई से ऊपर सड़क तक लाया गया। घंटों चले अभियान के बाद सभी घायलों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया।

पुलिस के अनुसार हादसे में नाजमीन (32 वर्ष) पत्नी शाकिर और फरद बेगम (55 वर्ष) की मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल लोगों को हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल रेफर किया गया, जबकि मामूली रूप से घायल यात्रियों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई।

हादसे के बाद कई सवाल भी खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि दुर्घटनाग्रस्त टेंपो ट्रैवलर 22 सीटर था, लेकिन उसमें निर्धारित क्षमता से अधिक लोग सवार थे। वाहन नैनीताल से कालाढूंगी तक का अधिकांश सफर तय कर चुका था, बावजूद इसके रास्ते में किसी चौकी या जांच बिंदु पर ओवरलोडिंग पर कार्रवाई नहीं हुई। पर्यटन सीजन में क्षमता से अधिक सवारियां ढोने वाले वाहनों के संचालन को लेकर स्थानीय लोगों ने भी चिंता जताई है।

लाल मिट्टी क्षेत्र का यह मोड़ पहले भी कई हादसों का गवाह रह चुका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां तीखी ढलान, घुमावदार मोड़ और कई बार तेज रफ्तार वाहन दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। ऐसे में सड़क सुरक्षा उपायों और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

फिलहाल पुलिस और प्रशासन दुर्घटना के वास्तविक कारणों की जांच कर रहे हैं। शुरुआती तौर पर ब्रेक फेल होना हादसे की प्रमुख वजह माना जा रहा है, लेकिन ओवरलोडिंग और पहाड़ी मार्ग पर वाहन संचालन के अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है। एक खुशियों भरा पर्यटन सफर जिस तरह कुछ ही क्षणों में दर्दनाक हादसे में बदल गया, उसने एक बार फिर पहाड़ी सड़कों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।