वैशाली (बिहार)। करीब तीन दशक पुराने आपराधिक मामले में वैशाली की एक अदालत ने 84 वर्षीय व्यक्ति को दोषी करार दिया है। उम्र के इस पड़ाव पर, जब उन्हें चलने-फिरने के लिए दूसरों के सहारे की जरूरत पड़ रही है, अदालत के फैसले के बाद उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा है। मामले में सजा के बिंदु पर सुनवाई 2 जून को होगी।
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जानकारी के अनुसार मामला वर्ष 1992 का है। आरोप है कि गांव में रास्ते को लेकर हुए विवाद के दौरान कुछ लोगों ने एक दंपति पर हमला कर दिया था। घटना में घायल पक्ष की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया और पुलिस ने जांच के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। मामले की सुनवाई लंबे समय तक चली। इस दौरान कई गवाहों के बयान दर्ज किए गए और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ती रही। वर्षों के दौरान केस में नामजद कुछ अन्य आरोपियों का निधन भी हो गया, जबकि मुकदमे का सामना कर रहे एकमात्र जीवित आरोपी के रूप में 84 वर्षीय व्यक्ति अदालत में उपस्थित हुए।
जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश की अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दंगा तथा हत्या के प्रयास से जुड़ी धाराओं में दोषी माना है। अदालत अब 2 जून को यह तय करेगी कि दोषी को कितनी सजा दी जाए। फैसले के बाद अदालत परिसर से सामने आई तस्वीरों में बुजुर्ग को सहारा देकर ले जाते हुए देखा गया। उम्र और शारीरिक कमजोरी के कारण वह स्वयं ठीक से चलने में असमर्थ दिखाई दिए।
यह मामला इस बात का भी उदाहरण बन गया है कि न्यायिक प्रक्रिया भले लंबी हो, लेकिन गंभीर मामलों में कानूनी कार्रवाई वर्षों बाद भी अपने निष्कर्ष तक पहुंच सकती है। मुख्य बिंदु: मामला वर्ष 1992 के हमले से जुड़ा। लगभग 33 वर्ष बाद अदालत ने सुनाया फैसला। 84 वर्षीय आरोपी को दोषी करार दिया गया। सजा पर सुनवाई 2 जून को होगी। लंबे मुकदमे के दौरान कई सह-आरोपियों का निधन हो चुका है।

