10 बकरियों से शुरू हुआ सफर, कोटाबाग की भावना देवी अपनी मेहनत और सरकारी सहयोग से से बनी आत्मनिर्भरता की मिसाल

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नैनीताल। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित स्वरोजगार और आजीविका संवर्धन योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में नई उम्मीद जगा रही हैं। सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ अब सीधे गांवों तक पहुंच रहा है, जिससे महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। नैनीताल जनपद के कोटाबाग ब्लॉक के गिन्ती गांव की रहने वाली भावना देवी आज इसी बदलाव की प्रेरणादायक तस्वीर बनकर सामने आई हैं।

 

भावना देवी, पत्नी दोसारी लाल, ने सीमित संसाधनों और सामान्य आर्थिक परिस्थितियों के बावजूद हार नहीं मानी। उन्होंने संगठन और सीएलएफ स्तर पर व्यक्तिगत उद्यमिता को अपनाते हुए बकरी पालन का कार्य शुरू किया। शुरुआत आसान नहीं थी, लेकिन आत्मविश्वास और मेहनत के बल पर उन्होंने अपने सपनों को साकार करने का संकल्प लिया।

भावना देवी को ग्रामीण उद्यम त्वरण परियोजना (REAP) योजना के अंतर्गत लगभग 19 हजार 500 रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई। यह सहयोग उनके लिए किसी नई उम्मीद से कम नहीं था। इस सहायता से उन्होंने बकरी पालन की शुरुआत की और “नई किरण समूह” के अंतर्गत अपने कार्य को आगे बढ़ाया।

शुरुआती दौर में भावना देवी ने 10 बकरियों के साथ अपना छोटा व्यवसाय शुरू किया। उन्होंने पूरी मेहनत और लगन के साथ बकरियों की देखभाल की। धीरे-धीरे उनका यह कार्य बढ़ता गया और आज उनके पास 22 बकरियों की सफल इकाई तैयार हो चुकी है। इस दौरान उन्होंने कुछ बकरियों की बिक्री कर लगभग 32 हजार रुपये की अतिरिक्त आय भी अर्जित की। इस आय ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

भावना देवी बताती हैं कि पहले परिवार की जरूरतों को पूरा करना काफी मुश्किल होता था, लेकिन अब बकरी पालन उनके परिवार के लिए स्थायी आय का माध्यम बन गया है। इससे न केवल आर्थिक स्थिति सुधरी है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा है। आज वह अपने बच्चों की जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा कर पा रही हैं और भविष्य को लेकर भी आश्वस्त हैं।

गांव में भावना देवी की सफलता अब अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है। कई महिलाएं उनसे प्रेरित होकर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाने की सोच रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं का इस तरह आत्मनिर्भर बनना सामाजिक और आर्थिक बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

भावना देवी की यह सफलता कहानी इस बात का प्रमाण है कि यदि सही मार्गदर्शन, सरकारी योजनाओं का सहयोग और मजबूत इच्छाशक्ति हो, तो कोई भी व्यक्ति अपनी परिस्थितियों को बदल सकता है। धामी सरकार की योजनाएं आज ग्रामीण महिलाओं के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला रही हैं और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के सपने को मजबूती दे रही हैं।

यह कहानी केवल एक महिला की उपलब्धि नहीं, बल्कि उत्तराखंड की उन हजारों महिलाओं की उम्मीद है, जो अपने दम पर नई पहचान बनाने का सपना देख रही हैं।