नई दिल्ली। मध्य पूर्व में जारी युद्ध का असर अब सीधे आम लोगों की रसोई तक महसूस होने लगा है। ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल और गैस सप्लाई चेन को झकझोर दिया है, जिसका सीधा असर भारत पर पड़ा है। एलपीजी पर काफी हद तक आयात पर निर्भर भारत इस समय गैस की कमी से जूझ रहा है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियां अब एक बड़े बदलाव पर विचार कर रही हैं—घरेलू गैस सिलेंडर के वजन में कटौती।
14.2 किलो से 10 किलो: क्या बदलेगा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मौजूदा 14.2 किलो के एलपीजी सिलेंडर को घटाकर 10 किलो करने का प्रस्ताव सामने आया है। इसका मकसद साफ है कि सीमित गैस स्टॉक को ज्यादा से ज्यादा घरों तक पहुंचाना।
अगर यह योजना लागू होती है तो कीमत में भी उसी अनुपात में कमी आएगी। उदाहरण के तौर पर, ₹913 के सिलेंडर की कीमत घटकर करीब ₹640 के आसपास हो सकती है। ग्राहकों को भ्रम से बचाने के लिए नए सिलेंडरों पर अलग पहचान। जैसे विशेष स्टिकर या सील लगाई जा सकती है।
क्यों गहराया संकट?
भारत की करीब 90% एलपीजी आपूर्ति हॉर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है, जो इस समय युद्ध के असर वाले क्षेत्र के बेहद करीब है।
तनाव के चलते इस मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। हालिया आंकड़े बताते हैं कि एक हफ्ते में सिर्फ 92,700 टन गैस भारत पहुंची जो देश की सिर्फ एक दिन की जरूरत के बराबर है। ऐसे में स्टॉक तेजी से घट रहा है और नई सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
सरकार के सख्त कदम
स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने पहले ही कई फैसले लागू कर दिए हैं।
- रिफिल गैप बढ़ा: अब दो सिलेंडर बुकिंग के बीच 21 की जगह 25 दिन का अंतर
- कीमत में बढ़ोतरी: घरेलू एलपीजी पर ₹60 तक का इजाफा
- घरेलू प्राथमिकता: कमर्शियल के बजाय घरेलू उपभोक्ताओं को गैस सप्लाई में प्राथमिकता
चुनौतियां भी कम नहीं
ऑयल कंपनियों ने इस प्रस्ताव को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि अचानक वजन घटाने से लोगों में भ्रम और असंतोष पैदा हो सकता है। साथ ही, बॉटलिंग प्लांट्स में मशीनों को 10 किलो के हिसाब से दोबारा सेट करना तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण होगा।
क्या है सबसे बड़ा खतरा?
सरकार का फिलहाल सबसे बड़ा लक्ष्य है कि किसी भी हाल में “ड्राई-आउट” यानी गैस का पूरी तरह खत्म हो जाना रोकना। आने वाले कुछ दिन भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं। अगर हालात नहीं सुधरे, तो आम आदमी की रसोई पर इसका असर और गहरा हो सकता है।

