केरल में कांग्रेस विधायक दल का नेता चुनने के बाद सियासी बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने वीडी सतीशन को मुख्यमंत्री पद के लिए आगे कर दिया है, लेकिन इस फैसले के साथ ही पार्टी के भीतर गुटबाजी और केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका पर सवाल भी खड़े होने लगे हैं। भाजपा ने इसे “दिल्ली से नियंत्रित फैसला” बताते हुए कांग्रेस पर निशाना साधा है।
दरअसल, मुख्यमंत्री पद की दौड़ में केवल वीडी सतीशन ही नहीं थे, बल्कि केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला जैसे बड़े चेहरे भी दावेदार माने जा रहे थे। लंबे मंथन और कई दौर की बैठकों के बाद आखिरकार आलाकमान ने सतीशन के नाम पर मुहर लगाई। इसके बाद भाजपा ने कांग्रेस पर “रिमोट कंट्रोल सरकार” चलाने का आरोप लगाया।
प्रदेश नेतृत्व से ज्यादा हाईकमान का फैसला…?
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला का कहना है कि मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा केरल में नहीं, बल्कि दिल्ली स्थित एआईसीसी मुख्यालय से हुई। इससे यह संदेश जाता है कि राज्य नेतृत्व की बजाय केंद्रीय नेतृत्व ज्यादा प्रभावी है। भाजपा ने यह भी दावा किया कि गांधी परिवार के भीतर अलग-अलग नेताओं को लेकर मतभेद थे और उसी के चलते फैसले में देरी हुई।
हालांकि कांग्रेस इसे संगठनात्मक प्रक्रिया बता रही है, लेकिन राजनीतिक जानकार मानते हैं कि मुख्यमंत्री चयन में हुई लंबी देरी ने पार्टी के भीतर मौजूद खींचतान को सार्वजनिक कर दिया।
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या?
केरल की राजनीति में कांग्रेस लंबे समय बाद मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। ऐसे समय में सबसे बड़ी चुनौती सरकार चलाने से ज्यादा संगठन और नेतृत्व के बीच संतुलन बनाए रखने की होगी। अगर मुख्यमंत्री और दूसरे वरिष्ठ नेताओं के बीच तालमेल नहीं बैठा, तो इसका असर सरकार और संगठन दोनों पर पड़ सकता है।
कर्नाटक का उदाहरण लगातार सामने रखा जा रहा है, जहां नेतृत्व को लेकर समय-समय पर विवाद की खबरें आती रही हैं। भाजपा अब उसी मॉडल को केरल में भी लागू होने की आशंका जता रही है।
गठबंधन राजनीति का भी रहेगा दबाव
केरल में कांग्रेस केवल अकेले दम पर राजनीति नहीं करती, बल्कि उसे सहयोगी दलों के साथ तालमेल बनाकर चलना पड़ता है। ऐसे में मुख्यमंत्री चयन में सहयोगी दलों की राय और सामाजिक समीकरण भी अहम भूमिका निभाते हैं। भाजपा ने मुस्लिम वोट बैंक और सहयोगी दलों के दबाव की बात कहकर इसी मुद्दे को उछालने की कोशिश की है।
जनता की नजर अब फैसलों पर
सियासी आरोप-प्रत्यारोप अपनी जगह हैं, लेकिन असली परीक्षा अब नई सरकार की कार्यशैली होगी। जनता यह देखेगी कि कांग्रेस नेतृत्व स्थिर सरकार दे पाता है या फिर अंदरूनी राजनीति ही सरकार पर भारी पड़ती है।
केरल की राजनीति हमेशा वैचारिक मुकाबले और मजबूत नेतृत्व के लिए जानी जाती रही है। ऐसे में वीडी सतीशन के सामने केवल मुख्यमंत्री बनने की नहीं, बल्कि कांग्रेस को एकजुट रखने की भी बड़ी जिम्मेदारी होगी।

