नई दिल्ली। ब्रिटेन की संसद में एक बार फिर “ग्रूमिंग गैंग” कांड को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। सांसद रूपर्ट लोव ने संसद में उन महिलाओं के बयान पढ़कर सुनाए, जिन्होंने बचपन और किशोरावस्था में संगठित यौन शोषण का सामना करने का दावा किया। इन गवाहियों ने पूरे ब्रिटेन को झकझोर दिया है।

संसद में पढ़े गए बयानों में एक महिला ने दावा किया कि 13 वर्ष की उम्र से शुरू हुए शोषण के दौरान तीन वर्षों में लगभग 600 से 700 अलग-अलग पुरुषों ने उसका दुष्कर्म किया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसे लगातार धमकाया जाता था और चुप रहने के लिए डराया जाता था।
एक अन्य महिला ने दावा किया कि उसने अपनी आंखों से 15 से 20 महिलाओं को पिंजरों में बंद देखा था। कुछ पीड़िताओं ने आरोप लगाया कि उन्हें पार्टियों में ले जाया जाता था, जहां उनके साथ हिंसा और यौन शोषण किया जाता था।
आखिर क्या है ग्रूमिंग गैंग?
ब्रिटेन में “ग्रूमिंग गैंग” शब्द उन संगठित गिरोहों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जो कमजोर, बेसहारा या नाबालिग लड़कियों को अपने जाल में फंसाते हैं। शुरुआत में दोस्ती, उपहार, पैसे या झूठे प्रेम का सहारा लिया जाता है। जब लड़की भरोसा करने लगती है तो उसे धमकियों, नशे या दबाव के जरिए शोषण के चक्र में धकेल दिया जाता है। कई मामलों में पीड़िताओं को एक शहर से दूसरे शहर तक ले जाने और कई लोगों द्वारा शोषण किए जाने के आरोप लगे हैं।
कैसे काम करता था यह नेटवर्क?
जांच रिपोर्टों और पूर्व मामलों के अनुसार गिरोह पहले किशोरियों को निशाना बनाते थे। उन्हें महंगे उपहार, घूमने-फिरने या प्रेम संबंध का झांसा दिया जाता था। इसके बाद धीरे-धीरे उन्हें अपराधियों के नियंत्रण में लाया जाता था। कई मामलों में पीड़िताओं को अन्य लोगों के पास भेजा जाता था और लंबे समय तक उनका शोषण किया जाता था।
पीड़िताओं के आरोप
संसद में पढ़े गए बयानों के अनुसार कई पीड़िताओं ने आरोप लगाया कि उनके साथ अत्यधिक हिंसा की गई। कुछ ने कहा कि जब उन्होंने मदद मांगने की कोशिश की तो पुलिस, अस्पतालों और अन्य संस्थाओं ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया। एक महिला ने दावा किया कि अस्पताल पहुंचने पर भी उससे ज्यादा सवाल नहीं पूछे गए और उसे वापस भेज दिया गया। कुछ पीड़िताओं ने यह भी आरोप लगाया कि अपराधी उनकी नस्ल और धर्म को लेकर अपमानजनक टिप्पणियां करते थे और इसी आधार पर उन्हें मानसिक रूप से तोड़ने की कोशिश करते थे।
रूपर्ट लोव द्वारा समर्थित एक स्वतंत्र जांच में दावा किया गया है कि ब्रिटेन के 85 से अधिक क्षेत्रों में समूह आधारित बाल यौन शोषण के मामले सामने आए हैं। सांसद ने कहा कि यह समस्या पहले समझी गई तुलना में कहीं अधिक व्यापक हो सकती है।
क्यों मचा है राजनीतिक तूफान?
ब्रिटेन में यह मामला नया नहीं है। रोदरहैम, रोचडेल और अन्य शहरों में पहले भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं। हाल के वर्षों में कई रिपोर्टों ने पुलिस, सामाजिक सेवाओं और अन्य संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। कुछ जांचों में यह भी कहा गया कि कई बार अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, जिससे पीड़ितों को लंबे समय तक न्याय नहीं मिल सका।
ब्रिटेन की संसद में उठी यह बहस केवल पुराने मामलों की चर्चा नहीं है, बल्कि यह सवाल भी है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए सरकारी संस्थाएं कितनी जिम्मेदार हैं। पीड़ितों की गवाहियों ने एक बार फिर पूरे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए और क्या कदम उठाए जाने चाहिए।

