सींगों ने उलझाया बीमा क्लेम, कान के टैग ने दिलाए 50 हजार रुपये

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देहरादून में बीमा कंपनी ने गाय के सींगों में अंतर को आधार बनाकर उसका बीमा दावा खारिज कर दिया, लेकिन कान में लगा एक छोटा-सा टैग नंबर कंपनी के तर्क पर भारी पड़ गया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में सुनवाई के दौरान सामने आया कि मृत गाय के कान में वही टैग लगा था, जो बीमा के समय कंपनी ने लगाया था। आयोग ने इसे गाय की पहचान का निर्णायक आधार मानते हुए बीमा कंपनी को 50 हजार रुपये का दावा भुगतान करने का आदेश दिया है।

लोअर तुनवाला निवासी अनिल जोशी ने वर्ष 2018 में गाय खरीदने के लिए पंजाब नेशनल बैंक से ऋण लिया था। गाय का न्यू इंडिया एश्योरेंस कंपनी से 19 फरवरी 2018 से 18 फरवरी 2019 तक 50 हजार रुपये का बीमा कराया गया था। बीमा के दौरान गाय के कान में पहचान के लिए टैग लगाया गया था।

बीमा अवधि के दौरान 11 मार्च 2018 को गाय की अचानक मौत हो गई। जोशी ने इसकी सूचना बैंक और बीमा कंपनी को दी और नियमानुसार गाय का पोस्टमार्टम भी कराया। इसके बाद उन्होंने बीमा राशि के लिए दावा किया, लेकिन कंपनी ने यह कहते हुए भुगतान से इनकार कर दिया कि बीमित गाय और मृत गाय के सींगों में अंतर है।

कंपनी के इस तर्क के खिलाफ जोशी जिला उपभोक्ता आयोग पहुंच गए। सुनवाई के दौरान एक अहम तथ्य सामने आया। मृत गाय के कान में वही टैग मौजूद था, जो बीमा कंपनी ने जारी किया था। पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक ने भी टैग परिवादी को सौंपा था और बाद में इसे कंपनी के जांचकर्ता के सामने पेश किया गया।

आयोग के अध्यक्ष पुष्पेन्द्र खरे और सदस्य अल्का नेगी ने अपने फैसले में कहा कि पशु की पहचान के लिए बीमा कंपनी की ओर से लगाया गया टैग महत्वपूर्ण आधार है। केवल सींगों में अंतर के आधार पर बीमा दावा खारिज करना उचित नहीं माना जा सकता।

आयोग ने कंपनी को 45 दिन के भीतर 50 हजार रुपये का बीमा दावा, 10 हजार रुपये मुआवजा और पांच हजार रुपये वाद खर्च का भुगतान करने का आदेश दिया है। भुगतान में देरी होने पर परिवाद दाखिल करने की तारीख से वास्तविक भुगतान तक सात प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देना होगा।